पैरामाउंट पिक्चर्स की ओर से जोहानेस रॉबर्ट्स द्वारा बनाई गई फिल्म ‘प्राइमेट‘ अब भारत में जल्द ही हिंदी डबिंग के साथ देखने को मिलेगी। निर्देशक साहब ने इससे पहले भी ’47 मीटर डाउन’ नाम की सर्वाइवल हॉरर फिल्म बनाई है। यह फिल्म भी मुख्य रूप से हॉरर को पेश करती है जहां पर डर को एक जानवर के रूप में दर्शकों के सामने परोसा गया है।
यहां हमें थ्रिलर और मिस्ट्री भी देखने को मिलती है। आईएमडीबी की बात करें तो इसे 10 में से 6.2 की रेटिंग मिली है। यह रेटिंग एक लाख से ज्यादा वोट के आधार पर है। यह फिल्म मुख्य रूप से उन दर्शकों को पसंद आएगी जो हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और साथ ही जिन्हें एनिमल अटैक पर बनी फिल्में देखना पसंद है।
प्राइमेट रिव्यू हिंदी: क्या है इस डरावनी फिल्म की बेसिक कहानी?
कहानी यहां ‘लूसी’ नाम की एक लड़की की दिखाई गई है, जिसकी पढ़ाई खत्म हो चुकी है और वह कॉलेज की छुट्टियां मनाने के लिए अपने घर पर आई हुई है। लूसी का घर एक बेहद सुंदर जगह पर स्थित है, जहां पर ढेर सारी हरियाली, सूरज की मध्यम-मध्यम रोशनी, समुद्र की लहरें और परिवार का प्यार मौजूद है।
साथ ही घर में इनका एक पालतू जानवर ‘बिन’ है. जो कि चिंपैंजी है, वह भी मौजूद है। परिवार वालों के साथ यह चिंपैंजी कुछ इस तरह घुल-मिल गया है जिसे देखकर लगता है कि वह जानवर ना होकर बल्कि इंसान है और इसी फैमिली का एक हिस्सा है। पर कहानी को कुछ और ही मंजूर था। यहां ट्विस्ट उस समय आता है जब यह जानवर अनियंत्रित होकर एक खतरनाक रूप धारण कर लेता है।
एक समान अवस्था में चलने वाली यह फिल्म किस समय दर्शकों के दिल की धड़कनों को बढ़ा देती है ये पता ही नहीं चलता। अगर आपको भी डरावनी थ्रिलर सस्पेंस से भरी फिल्में देखने का शौक है तब आप इसे देख सकते हैं।
प्राइमेट के पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट क्या हैं?
प्राइमेट फिल्म को अब हिंदी भाषा में ओटीटी पर रिलीज कर दिया गया है। वैसे तो यह पहले ही इंग्लिश में इंटरनेशनली रिलीज कर दी गई थी, पर अब ये जल्द ही अमेज़न प्राइम के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हिंदी डब्ड वर्जन में भारत में भी देखने को मिल जाएगी। जिन दर्शकों को खून-खराबे वाली फिल्में देखना पसंद नहीं है वह इससे दूर ही रहे तो अच्छा है। यहां एक परिवार को अपने ही पालतू जानवर से खुद की जान बचानी है।
अब यह जानवर अचानक से पालतू होकर भी परिवार पर हमला क्यों करता है और वह इतना ताकतवर कैसे हो जाता है ये सब तो फिल्म देखकर ही पता लगाना होगा। ये उस तरह की कहानी नहीं है जहां दर्शकों को अपना बहुत दिमाग लगाना पड़े। ये एक सिंपल सी कहानी है जहां पर बस हमारे मन में एक ही बात चलती है कि किस तरह से इस चिंपैंजी से घर के लोग बचेंगे।
खून-खराबा भर-भर के यहां पर पेश किया गया है, तो जिन दर्शकों को यह देखना पसंद नहीं है, या दिल कमजोर है वह इस फिल्म को ना ही देखें तो बेहतर होगा। यहां पर एडल्ट या वल्गर सीन का तो इस्तेमाल नहीं हुआ है तो आप चाहे तो इसे अपने पूरे परिवार के साथ बैठ कर देख सकते हैं पर बच्चों के साथ ना ही देखें। वीएफएक्स और सीजीआई पर खास ध्यान दिया गया है क्योंकि फिल्म के ज्यादातर सीन में वीएफएक्स का भरपूर इस्तेमाल किया गया है।
मेकर के द्वारा कहानी को इस तरह से बनाया गया है कि यह शुरू से लेकर अंत तक दर्शकों को खुद से जोड़े रखने में पूरी तरह से कामयाब रहती है। मुझे इस फिल्म ने शुरू से लेकर अंत तक कहीं पर भी एक बार भी बोर फील नहीं कराया। कहानी में अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है कि आगे क्या होने वाला है।
कैरेक्टर डेवलपमेंट और इमोशंस की थोड़ी कमी रही है अगर इसे भी डाल दिया जाता तो शायद फिल्म और अच्छी बन सकती थी पर फिर भी एक बार आप इस फिल्म को देख सकते हैं।
मेरी तरफ से इसे दिए जाते हैं 5 में से 3.5 स्टार की रेटिंग। विदेश में प्राइम वीडियो के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हिंदी में इसे उपलब्ध करा दिया गया है। जल्द ही ये भारत में भी प्राइम वीडियो पर हिंदी डबिंग मे देखने को मिलेगी।
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