शेरलॉक का कैरेक्टर हमेशा से लोगों के अंदर उत्सुकता जगाता रहा है यह एक काल्पनिक मशहूर जासूस है जिसका निर्माण किया है ‘आर्थर कॉनन डॉयल’ ने। यह कैरेक्टर अपनी आंखों से उन चीजों को देख सकता है, जो एक आम इंसान नहीं देख पाता।
वह छोटी-छोटी कड़ी को जोड़कर जुर्म की तह तक जाकर उसे साबित कर देता है शेरलॉक का दिमाग एक चलता फिरता कंप्यूटर है, जिसमें हजारों किताबें बसी हुई हैं। इस कैरेक्टर को लेकर बहुत सी वेब सीरीज और फिल्में पहले भी बनाई जा चुकी है।
इसी तरह से अब ‘अमेज़न प्राइम’ के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर “यंग शेरलॉक” नाम की एक वेब सीरीज को रिलीज किया गया है। जहां शेरलॉक होम्स के जवानी के दिनों को दिखाया गया है। इसके आठ एपिसोड की लेंथ 45 से 55 मिनट के बीच की है जिसका निर्देशन गाय रिची के द्वारा किया गया है।
एक साधारण लड़के के असाधारण जासूस बनने का सफर
अगर आपको भी मेरी तरह जासूसी से भरी हुई कहानीयां देखना पसंद हैं, तब 100% आपको यह शो पसंद आने वाला है जहां इसके आठ एपिसोड दिखाए गए हैं। तो ऐसा नहीं है कि हर एपिसोड में आपको मजा आए कहीं-कहीं पर यह थोड़ा बोर भी फील कराएगा पर हर बार अचानक से रोमांच से भरे हुए कई सीन आ जाते हैं तब हमारा शो के प्रति लगाव और भी बढ़ जाता है।
जासूसी के साथ-साथ यहां पर एक्शन भी देखने को मिलता है, मुझे जो सबसे अच्छा लगा वह यंग शेरलॉक का ऑब्जरवेशन पावर था। एक आम इंसान चीजों को देखता है और फिर भूल जाता है, वहीं शेरलॉक छोटी से छोटी चीजों को समझ कर एक कड़ी जोड़ लेता है।
शेरलॉक अपनी याददाश्त को इस तरह से दिमाग में संजो कर रखता है, जैसे की कोई लाइब्रेरी हो, और वक्त पड़ने पर वह अपनी लाइब्रेरी से उस किताब को तुरंत निकाल कर पढ़ लेता है।
उसे केमिस्ट्री के साथ-साथ अपना रूप बदलने में भी गुणवत्ता हासिल है। एक बार यह सीरीज टाइमपास के लिए देखी जा सकती है जो भरपूर एंटरटेनमेंट का डोज देगी।
क्योंकि सबसे अच्छी बात यह है कि, इसके सभी कैरेक्टरों के साथ दर्शक इमोशनली रूप से जुड़ाव महसूस करते हैं। सीरीज़ के बीच-बीच में बोरियत को दूर करने के लिए जो रोमांच के सीन डाले गए हैं वह शानदार रहे।
सीरीज़ की सिनेमैटोग्राफी कोरियोग्राफी जबरदस्त है सभी एक्शन सीन अच्छे से दर्शाए गए हैं। जेम्स और यंग शेरलॉक की बॉन्डिंग को भी अच्छी तरह से पेश किया गया है। सीरीज को पूरी तरह से 18वीं शताब्दी में रखकर दिखाया गया है और जिस तरह से दिखाया गया है वह सच में देखकर लगता है कि यह 18वीं शताब्दी ही है।
रेटिंग: 3/5
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