Subedar Movie Review: अनिल कपूर की ‘सूबेदार’ प्राइम वीडियो पर रिलीज, जानें कैसी है यह एक्शन थ्रिलर फिल्म?

Amir Khan
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IMAGE CREDIT: SUBEDAAR MOVIE @PRIME VIDEO

‘सावी’ मूवी के बाद अब ‘अनिल कपूर’ दोबारा से ‘सूबेदार’ फिल्म में दिखाई दे रहे हैं, जिसे प्राइम वीडियो के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया है। इस एक्शन थ्रिलर से भरी हुई फिल्म में हमें सूबेदार अर्जुन मौर्या के कैरेक्टर में अनिल कपूर नजर आएंगे।

इनके साथ फिल्म में राधिका मदान, मोना सिंह, सौरभ शुक्ला, आदित्य रावल और फैसल मलिक जैसे कलाकार दिखाई देंगे। ‘सूबेदार’ का डायरेक्शन ‘सुरेश त्रिवेणी’ ने किया है।

वहीं इसे प्रोड्यूस करने वालों में अनिल कपूर, विक्रम मल्होत्रा और सुरेश शामिल हैं। ‘प्राइम वीडियो’ पर इसे तमिल, तेलुगु और हिंदी के साथ उपलब्ध कराया गया है।

‘सूबेदार’ फिल्म की कहानी (बिना स्पॉइलर्स)

कहानी की शुरुआत ट्रैक्टर से निकलते हुए धुएं से होती है। इस ट्रैक्टर का धुवां आपको अंत में समझ आएगा। इसके कुछ समय के बाद एक बच्चा पानी में डूब कर मर जाता है और यह पानी अवैध खनन के कारण हुए गड्ढों से आया है।

Subedaar movie scene: Man in green shawl sitting on ground in park talking intensely to woman, emotional family moment

 

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गांव वाले बच्चे की लाश को दफन नहीं करते, वे अपने मरे हुए बच्चे के लिए इंसाफ मांगते हैं और चाहते हैं कि केस दर्ज हो। पर इन अवैध खननों में बड़े लोगों का नाम जुड़ा हुआ है।

इस माफिया का नाम है ‘बबली दीदी’, जो कि धारा 301 के मुकदमे में जेल के अंदर है। सारा अवैध खनन प्रिंस और शशिकांत संभाल रहे हैं। प्रिंस इंसान के रूप में एक ‘इविल’ (शैतान) है।

अनिल कपूर यानी अर्जुन मौर्या यहाँ पर एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर के रूप में दिखाए गए हैं, जिसने अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम कर दी थी। उन्हें लगता था कि रिटायर होने के बाद वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ एक सामान्य जिंदगी बिताएंगे।

Subedaar movie scene: Young man in maroon jacket walking intensely in rural field, angry expression, action drama moment

 

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पर उनकी पत्नी की एक रेत से भरे ट्रक की टक्कर से मौत हो जाती है। सूबेदार जब अपने घर वापस आता है तो उसे समाज में फैला हुआ भ्रष्टाचार और अंधेरगर्दी नजर आती है। पत्नी के मरने का दुख उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा है।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब सूबेदार की मुलाकात बालू की कालाबाजारी करने वाले माफियाओं से होती है। यहाँ एक पति का बदला और एक पिता के संघर्ष की कहानी है। जहाँ इमोशनल डेप्थ और जबरदस्त एक्शन देखने को मिलता है।

सौरभ शुक्ला, अनिल कपूर के दोस्त के रूप में हैं। क्लाइमेक्स के दृश्यों में दिखाए गए ‘नाना पाटेकर’ का रोल सॉलिड था। यहाँ बहुत से सोशल इश्यूज को भी दर्शाया गया है।

Subedaar movie scene: Anil Kapoor as retired Subedaar Arjun Maurya by red car in small-town street, intense action drama look

 

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फिल्म के पॉजिटिव पॉइंट्स

आदित्य रावल, राधिका मदान और मोना सिंह का जबरदस्त और शानदार परफॉर्मेंस देखने को मिलता है। फैसल मलिक यहाँ ‘सॉफ्टी भाई’ के रोल में हैं जिनका परफॉर्मेंस ठीक-ठाक ही था।

क्योंकि ‘सूबेदार’ ट्रेलर में वह जितना प्रभावशाली दिखाई दे रहे थे उतना फिल्म में नहीं दिखे। मुझे लगता है अनिल कपूर के ज्यादातर एक्शन वाले सीन बॉडी डबल ने किए थे, क्योंकि अनिल कपूर अभी 69 वर्ष के हैं जो उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था।

उनकी एक्टिंग में काफी सुस्ती थी वह एक्शन करते हुए तो दिखाए गए पर उनमें वह एनर्जी नजर नहीं आ रही थी जो साउथ फिल्म स्टार रजनीकांत की फिल्मों में अभी भी देखने को मिलती है।

Subedaar movie scene: Woman in brown saree lying on bed holding phone, worried emotional expression in dim room

 

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अनिल कपूर से ज्यादा क्लाइमेक्स में दिखाए गए नाना पाटेकर के कैरेक्टर में एनर्जी देखने को मिली। फिल्म में दिखाए गए सभी एक्शन सीन दमदार हैं म्यूजिक और बीजीएम भी ठीक ठाक है।

इसकी सिनेमैटोग्राफी फिल्म की थीम से मैच खाती है जो हमें शुरू से लेकर अंत तक यह एहसास दिलाती है कि यह खनन माफियाओं की कहानी को उजागर कर रही है।

फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स

नेगेटिव पॉइंट्स की बात की जाए तो, अनिल कपूर के दोस्त बने ‘सौरभ शुक्ला’ के किरदार को थोड़ा और प्रभावी बनाया जा सकता था। जैसा कि पहले ही बताया गया है अनिल कपूर की एक्टिंग में कुछ खास देखने को नहीं मिला, जैसी इसका ट्रेलर देखने के बाद उम्मीद की जा रही थी।

फिल्म ‘सूबेदार’ को आसानी से प्रेडिक्ट (अनुमान) किया जा सकता है एक छोटी सी तीन लाइन के प्लॉट पर बनी यह फिल्म देखकर आपको ऐसा लगेगा कि, इससे पहले आप इस तरह की बहुत सी फिल्में या वेब सीरीज देख चुके हैं। इसका मतलब साफ है कि कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है।

शुरुआती कहानी बहुत ही स्लो चलती है, पर आगे चलकर यह स्पीड पकड़ लेती है। यहाँ एक नहीं बल्कि बहुत से ऐसे सीन हैं जिनका वास्तविकता से दूर-दूर तक संबंध नजर नहीं आता।

समझ नहीं आता कि ऐसी इनलोजिकल चीजों को क्यों डाला गया ट्रेलर देखकर लग रहा था कि यह एक ‘मासी’ (Massy) फिल्म होने वाली है, पर एग्जीक्यूशन कमजोर होने और डायलॉग्स में दम न होने की वजह से यह वैसी नहीं बन पाई।

‘सूबेदार’ फिल्म ‘One Time Watch’ है, जिसे दिमाग को अलग रखकर मजे के लिए एक बार देखा जा सकता है। इसमें एक के बाद एक ट्विस्ट और टर्न आते रहते हैं जो कभी-कभी बेवजह लगते हैं पर देखने में अच्छे लगते हैं।

कहानी शुरू से लेकर अंत तक कहीं पर भी बोर नहीं करती, पर हाँ आगे क्या दिखाया जाने वाला है यह आपको पहले ही पता लग जाएगा। कुछ सामाजिक मुद्दों को जिस तरह से दिखाया गया है, वह बेहद शानदार रहा।

पर इसके साथ और भी बहुत कुछ जोड़ा जा सकता था। क्लाइमेक्स में कुछ ऐसा दिखाया गया है जिससे मेकर्स की ओर से यह हिंट मिलता है कि इसका पार्ट 2 भी आ सकता है।

फिल्म के टेक्निकल पॉइंट्स

मध्य प्रदेश की पृष्ठभूमि पर दिखाई गई ‘सूबेदार’ फिल्म की सिनेमैटोग्राफी ठीक-ठाक है। कैमरा वर्क शानदार है और ब्राइटनेस व लाइटिंग पर अच्छा ध्यान दिया गया है।

हर एक सीन के हिसाब से इसमें कलर्स डाले गए हैं। कहीं-कहीं पर फ्लैशबैक का इस्तेमाल भी किया गया है। डायलॉग्स बहुत प्रभावी नहीं थे, जिन्हें और बेहतर किया जा सकता था।

फिल्म ‘सूबेदार’ की एडिटिंग ठीक-ठाक है कम समय में बहुत कुछ दिखाने की कोशिश की गई है। प्रोडक्शन वैल्यू भी बढ़िया थी और वीएफएक्स (VFX) व सीजीआई (CGI) का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं हुआ है।

निष्कर्ष:

अगर आप इस वीकेंड कुछ ऐसा ढूंढ रहे हैं, जिसे बिना सिनेमाघर जाये घर में ही देखा जा सके। तब अनिल कपूर की फिल्म ‘सुबेदार’ आपके लिए एक बेस्ट रिकमंडेड है। क्योंकि इसमें एक्शन, ससपेंस का बढ़िया मिक्सअप देखने को मिलता है। साथ ही ‘सूबेदार’ फिल्म में कोई एडल्ट सीन नहीं है, जिस वजह से आप इसे फैमिली के साथ भी आसानी से देख सकते हैं।

रेटिंग 3/5

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