Maadeva Movie Review: सिर्फ 3 करोड़ की फिल्म ने कमाए 10 करोड़, ‘मादेवा’ अब हिंदी में, क्या आपने देखी यह खौफनाक प्रेम कहानी?

Maadeva Movie Review: कन्नड़ एक्शन-ड्रामा फिल्म 'Maadeva' में विनोद प्रभाकर एक भावनाहीन जल्लाद महादेव की भूमिका में हैं, जो पार्वती (सोनल मोंटेरो) से मिलकर प्यार और इंसानियत महसूस करता है। कम बजट में बनी यह इमोशनल कहानी तीन टाइमलाइन (1965-1999) में मौत, प्यार और बदलाव दिखाती है। IMDb 6.4, अब

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February 15, 2026 1:12 PM (IST)
Maadeva Movie Review in hindi

6 जून 2025 को रिलीज हुई कन्नड़ भाषा की एक्शन ड्रामा रोमांटिक फिल्म ‘मादेवा‘ (Maadeva), जिसे फाइनली अब हिंदी डबिंग के साथ अमेज़न प्राइम के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया है। फिल्म के मुख्य कलाकारों में विनोद प्रभाकर और सोनल दिखाई दे रहे हैं।

3 से 4 करोड़ के बेहद कम बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तकरीबन 10 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। 6.4 आईएमडीबी रेटिंग वाली यह फिल्म कैसी है आइए जानते हैं।

क्या है फिल्म मादेवा का बेसिक प्लॉट

मादेवा फिल्म की कहानी महादेव के इर्द-गिर्द घूमती है जो बहुत साधारण सी जिंदगी जी रहा है पर ये जिंदगी बेहद दुखदाई है। महादेव जेल में काम करता है और उसका काम फांसी देने का (जल्लाद) है। महादेव ने कई लोगों को फांसी दी है। फांसी देने के बाद वह अंदर से टूट सा जाता है।

महादेव ना अब हंसता है और ना ही रोता है, बस उदास रहता है। वह ये बात अच्छी तरह से समझता है कि लोग उसे देखकर डर जाते हैं। महादेव अपने काम की वजह से ऐसा हो गया है। जैसे मानो उसके लिए किसी को मौत के घाट उतारना खेल सा है।

एक सीन में दिखाया गया है कि महादेव एक मुजरिम को फांसी देकर वहीं बैठकर बिरयानी खाने लगता है जिसे देखकर लगता है कि उसके लिए अब फांसी देना नॉर्मल सी बात है।

महादेव की मुलाकात पार्वती से होती है जिसकी मां जेल में बंद है और वह अपनी मां के लिए जेल के अंदर खाना ले जाना चाहती है। इसके लिए वह महादेव की मदद लेती है। महादेव पार्वती से मिलने के बाद बदलने लगता है। उसके अंदर का पत्थर पिघलने लगता है।

कहानी की गहराई और देशु का कनेक्शन कैसा रहा

फिल्म ‘मादेवा’ एक इमोशन से भरी हुई दमदार कहानी है जो हमें दिखाती है, कि मौत का काम करने वालों की जिंदगी का क्या मतलब है। कहानी तीन टाइमलाइन में घूमती है 1965, 1980, 1999। महादेव के अतीत और उसके जल्लाद बनने की कहानी को निर्देशक ने बहुत अच्छे से पेश किया है।

कहानी में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे दर्शक पूरी तरह से खुद को कनेक्ट कर सके। एक साधारण सी रोमांटिक फिल्म जिन दर्शकों को पसंद आती है वह इसे देख सकते हैं पर बहुत कम उम्मीद के साथ।

जिसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि इसका बजट बेहद कम था। फिल्म में दिखाए गए सभी इमोशनल सीन भावुक कर देते हैं। फिल्म को ओटीटी के साथ-साथ आप यूट्यूब पर फ्री में भी देख सकते हैं।

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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