Hijack 1971 Review: शुरुआत बोरिंग पर हाइजैकिंग के बाद टेंशन का तूफान

Hijack 1971 Review: सच्ची घटना पर आधारित 'हाईजैक 1971' एक जबरदस्त कोरियन थ्रिलर है। शुरुआती बोरियत के बाद, फिल्म का सस्पेंस, शानदार कैमरा वर्क और इमोशनल डेप्थ रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव देते हैं।

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February 22, 2026 11:09 AM (IST)
Hijack 1971 Movie Review Hindi

हाईजैक 1971 (Hijack 1971) एक कोरियन एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जो 2024 में रिलीज हुई थी। IMDb पर इस समय इसकी 10 में से 6.8 रेटिंग और रॉटेन टोमेटो पर 84% का स्कोर है। अगर आपने 2021 में आई इमरजेंसी डिक्लेरेशन 2014 में आई ‘नॉन स्टॉप’ और 1997 में ‘एयर फोर्स वन’ जैसी फिल्में देख रखी हैं।

तो कुछ हद तक यहाँ भी कहानी वैसी ही नजर आती है जैसी कि इन फिल्मों की थी। “हाईजैक 1971” फिल्म में सभी एक्टरों ने जबरदस्त काम किया है। टेंशन और सस्पेंस को इस कदर रियल दिखाने की कोशिश की गई है जो रोंगटे खड़े कर देने वाला है।

​फिल्म की बेसिक कहानी

​कहानी की शुरुवात होती है 1969 से जहाँ आसमान को चीरता हवाई जहाज उड़ता दिखाई देता है। तभी पायलेट को निर्देश दिया जाता है की नार्थ कोरिया जाते हुए हाई जैक प्लेन के एक इंजन पर गोली मार दो और उस प्लेन को नार्थ कोरिया जाने से रोको।

लेकिन पायलेट ऐसा करने से मना कर देता है क्योंकि वह जानता है इससे प्लेन मे बैठे हुए लोग मारें जा सकते है। जिस वजह से पायलट को कुछ समय के लिए सस्पेंड भी कर दिया जाता है बाद में साउथ कोरिया नॉर्थ, कोरिया से अपने लोगों को बचा लेती है।

पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनको वापस नहीं लाया गया। 11 लोगों को उनके विशिष्ट कौशल की वजह से वापस नहीं भेजा गया बल्कि कहीं और ले जाया गया।

1971 मे वही पायलेट एक प्लेन को ले जा रहा है तभी पता चलता है कि उसका प्लेन हाईजैक हो चुका है। हाईजैक करने वाला लड़का प्लेन में मौजूद है किसी को समझ नहीं आ रहा है, कि आखिर उसने यह क्यों किया?

वह बस पायलट से कहता है कि इस प्लेन को समुद्र की तरफ लेकर चलो। प्लेन के कुछ यात्री गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं पायलट प्लेन को नॉर्थ कोरिया की तरफ मोड़ देता है, जहां वह लड़का इस प्लेन को ले जाना चाहता है। अब यह लड़का ऐसा क्यों कर रहा है और वह क्या चाहता है, यह सब तो आपको फिल्म को देखकर ही पता लगाना होगा।

शुरुआत थोड़ी बोरिंग पर ट्विस्ट और टर्न की भरमार

​इस फिल्म की शुरुआत काफी बोरिंग तरीके से की गई है, पर हाईजैकिंग के बाद जो टेंशन, थ्रिलर और डर कहानी में देखने को मिलता है, तब दर्शकों के मन में एक ही सवाल चलता रहता है कि आखिर आगे फिल्म में क्या देखने को मिलेगा।

मैंने जब यह फिल्म देखना शुरू की तब मन एक सवाल कर रहा था, कि आखिर मेकर्स ने यह फिल्म क्या सोचकर बनाई। पर जैसे ही 20 से 25 मिनट बीते कहानी ने अपना रूप ऐसा बदला कि दिमाग सोचने पर मजबूर था, कि आखिर आगे क्या होने वाला है।

सबसे शानदार तो फिल्म का कैमरा एंगल लगा। ​वीएफएक्स (VFX) और सीजीआई (CGI) अच्छे हैं जिसकी एक वजह इसका बजट है क्योंकि इसकी प्रोडक्शन क्वालिटी दमदार है।

1 घंटे 40 मिनट की इस फिल्म में जिस तरह से कैरेक्टर की इमोशनल डेप्थ को भी दिखाया गया है, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए उतनी कम है। फिल्म के म्यूजिक और बीजीएम (BGM) पर भी खास ध्यान दिया गया है, जो इसके हर एक सीन को और भी रोमांचक बनाने का काम करता है।

सबसे ज्यादा सरप्राइज यह फिल्म तब करती है, जब यहाँ दिखाया जाता है कि इस फिल्म की कहानी रियल इंसिडेंट पर आधारित है। ऐसा नहीं है कि यहाँ कमियाँ नहीं हैं, फिल्म में बहुत सी कमियाँ हैं, पर जब दर्शकों को यह बात पता चलती है कि यह एक रियल कहानी से इंस्पायर है, तो उन कमियों को आसानी से नजरअंदाज किया जा सकता है।

यहाँ टेंशन और थ्रिलर को जिस तरह से दिखाया गया है, वो हमें इसे बिना पलकें झपकाए देखने को मजबूर करता है। जो दर्शक इस तरह की टेंशन से भरी फिल्में देखने के शौकीन हैं, उनके लिए यह मस्ट वॉच बनती है। मुझे तो यह फिल्म बहुत पसंद आई है, मैं इसे दूंगा 3/5 स्टार की रेटिंग।

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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