एक तरफ भारतीय सिनेमाघरों में 27 फरवरी 2026 के दिन ‘द केरला स्टोरी 2’ को रिलीज किया गया है। वहीं दूसरी ओर ओटीटी भी पीछे नहीं, क्योंकि नेटफ्लिक्स भी लेकर आया है अपनी एक नई फिल्म जिसका नाम “एक्यूज्ड” है।
इस फिल्म के मुख्य कलाकारों में ‘कोंकणा सेन‘ जैसी दिग्गज अदाकारा देखने को मिलती हैं, जिन्हें आपने इससे पहले बहुत सारी अच्छी अच्छी फिल्मों में देखा होगा, जिनकी दमदार फिल्मों में ‘वेकअप सिड’ और ‘एक थी डायन’ शामिल हैं।
एक्यूज्ड मूवी का निर्देशन ‘अनुभूति कश्यप’ ने किया है, जो इससे पहले ‘Doctor G’ फिल्म को निर्देशित कर चुकी है, और इस बार अनुभूति लेकर आई हैं ड्रामा और थ्रिलर से भरी हुई फिल्म एक्यूज्ड। तो चलिए जानते हैं कैसी है फिल्म एक्यूज्ड और करते हैं इसका रिव्यू।
एक्यूज्ड फिल्म की स्टोरी
डायरेक्टर अनुभूति कश्यप की फिल्म एक्यूज्ड में एक ऐसी दुनिया दिखाई देती है जिसमें दो लड़कियां रिलेशनशिप में देखने को मिलती हैं यानी कि यह पूरी तरह से लेस्बियन वाला कांसेप्ट है।

इस फिल्म की कहानी मुख्य रूप से यूनाइटेड किंगडम (UK) लंदन में बेस्ड है, जहां एक तरफ है गीतिका (कोंकणा सेन) जो काफी सफल डॉक्टर है और पिछले कई सालों से अपने इस प्रोफेशन के दम पर ही उसने काफी नाम कमाया है।
वहीं दूसरी तरफ है मीरा (प्रतिभा रांटा), मीरा भी पेशे से एक इंटर्न डॉक्टर है और फिलहाल अपनी ट्रेनिंग पर है। लेकिन यह कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ती है हमें पता चलता है, कि मीरा और गीतिका सिर्फ अच्छे दोस्त और रूम पार्टनर ही नहीं, बल्कि रिलेशनशिप में भी हैं और जल्द ही बच्चा गोद लेने की प्लानिंग भी कर रही हैं।
हालांकि फिलहाल मीरा के घर वालों को इस बात की बिल्कुल भी भनक नहीं है कि उनकी बेटी लेस्बियन है और उसे लड़कों के बजाय लड़कियों में इंटरेस्ट है। मीरा का घर ‘मेरठ’ में है हालांकि अब वह पिछले 2 साल से यूके में ही रह रही है।

इसी दौरान मीरा का एक कजिन भाई ‘रोहित’ (डेलज़ाद हिवाले) भी उससे मिलने आना चाहता है, हालांकि मीरा हमेशा ही उसे इग्नोर करती है, क्योंकि वह नहीं चाहती कि गीतिका और उसके रिश्ते के बारे में उसके कजिन रोहित या उसके फिर घर वालों को पता चले।
वहीं दूसरी तरफ गीतिका है जिसका बिहेवियर काफी स्ट्रिक्ट है और वह अपने काम में किसी भी तरह की गड़बड़ी को इग्नोर नहीं करती।
यही वजह है कि उसके साथ जितने भी लोगों ने पिछले समय में इंटर्नशिप की है वह सभी गीतिका को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं। इसी कारन से वे सभी इंटर्न कुछ समय बाद वे लोग रिजाइन देकर इस हॉस्पिटल से चले जाते हैं।
गीतिका के इस हार्श यानी खड़ूस बिहेवियर की वजह से उसने अपने कई दुश्मन बना रखे हैं, हालांकि अस्पताल की मैनेजर सिमरन (मोनिका महेन्द्रू), गीतिका की पुरानी दोस्त है और वह उसे हर बार ही मुश्किलों से बचा लेती है।

जैसे कि डॉक्टर मार्टिन (डेनियल सेकंडी), हालांकि मार्टिन भी गीतिका का ही एक साथी डॉक्टर है। लेकिन मार्टिन भी कभी कभी जब ऑपरेशन के दौरान गलतियां कर देता है, तो उन गलतियों को सुधारने के लिए गीतिका ही उसकी मदद करती है।
लेकिन फिर भी गीतिका के हार्श बिहेवियर की वजह से मार्टिन को ऐसा लगता है, कि डॉक्टर गीतिका उसके काम में हमेशा ही टांग अड़ाती है और उसके केस भी ले लेती है।
लेकिन इस फिल्म में एक काफी दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब अस्पताल प्रशासन को बहुत सारे ईमेल्स रिसीव होते हैं और इन सभी ईमेल में एक ही बात लिखी है, कि डॉक्टर गीतिका अपने बहुत सारे मरीजों का शारीरिक शोषण कर चुकी है।
शुरुआत में तो गीतिका की दोस्त सिमरन इस मामले को दबा लेती है, लेकिन जैसे-जैसे इन ईमेल्स की संख्या बढ़ती जाती है उसको देखते हुए अस्पताल प्रशासन एक खास तरह की इन्वेस्टिगेशन टीम बनाता है जिसके अंतर्गत कई व्यक्ति शामिल होते हैं, और वे अस्पताल में आकर सभी लोगों से पूछताछ करने की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।
जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि डॉक्टर गीतिका ने सच में किसी का शारीरिक शोषण किया है या फिर यह सब अफवाहें हैं? उनके करियर को खत्म करने के लिए।

कहानी का मुख्य प्लॉट इसी पर आधारित है कि क्या गीतिका एक्यूज्ड यानी दोषी है या फिर नहीं? इस बड़े सवाल का जवाब जानने के लिए आपको देखनी होगी यह फिल्म जो कि नेटफ्लिक्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर, तमिल, तेलुगू के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी उपलब्ध है।
कलाकारों की एक्टिंग कैसी है
कोंकणा सेन का मज़बूत अवतार
कोंकणा सेन ने जिस तरह से एक्यूज्ड फिल्म में डॉक्टर गीतिका का किरदार निभाया है, वो काफी स्ट्रांग वूमेन के रूप में नजर आती हैं। जो काफी सेल्फ डिपेंडेंट है साथ ही वह अपनी उस परफेक्ट रिलेशनशिप की तलाश में है, जिसके साथ वह पूरी लाइफ रह सके। हालांकि उसकी इस तलाश की वजह से गीतिका ने बीती जिंदगी में काफी लड़कियों का दिल भी दुखाया है।
दिलचस्प डिटेक्टिव भार्गव
फिल्म में एक डिटेक्टिव ‘जयदीप भार्गव’ (Mashhoor Amrohi) के किरदार को भी दिखाया गया है, यह रोल काफी दिलचस्प है। जयदीप देखने में जितना उलझा हुआ नजर आता है, वह अपने प्रोफेशन में उतना ही सुलझा हुआ है। साथ ही वह अपने बेटे को भी उतनी ही प्रायोरिटी देता है जितनी अपने काम को।
खामोशी के पीछे छिपी अंगद की मोहब्बत
जहां एक तरफ मीरा है, जो गीतिका से प्यार करती है, वहीं दूसरी तरफ अंगद (आदित्य नंदा) भी देखने को मिलता है जो कि मीरा का बेस्ट फ्रेंड है और दिल ही दिल में उससे मोहब्बत करता है। लेकिन मीरा और डॉक्टर गीतिका के रिश्ते की वजह से मीरा की जिंदगी का एक इमोशनल पिलर बनकर रह गया है। इनकी एक्टिंग भी काफी बढ़िया है।
मूवी के तकनीकी पहलू
क्योंकि एक्यूज्ड फिल्म को नेटफ्लिक्स के प्रोडक्शन के तहत बनाया गया है जिस वजह से फिल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी टॉप नॉच यानी बेहतरीन है। इसको मुख्य रूप से लंदन में शूट किया गया है, जिस वजह से लंदन की सड़कें और वहां का नीला आसमान हर एक सीन में चार चांद लगा देता है।
यही वजह है कि फिल्म के बहुत सारे दृश्यों को आउटडोर में शूट किया गया है, ताकि UK की खूबसूरती स्क्रीन पर और भी ज़्यादा खिल कर आये।
वहीं दूसरी तरफ अगर, बात करें इस फिल्म के बीजीएम की, तो वह भी सस्पेंस थ्रिलर के हिसाब से बैलेंस होता रहता है। यही वजह है कि इसकी स्टोरी ने मुझे अंत तक बांध के रखा।
फिल्म के कमजोर पक्ष
मुझे लगता है यह पहली बार है, जब किसी बॉलीवुड फिल्म में लेस्बियन वाले रिश्ते को इतना ज्यादा नॉर्मलाइज करके दिखाया गया है। क्योंकि इस स्टोरी में जिस तरह से मीरा और गीतिका सिर्फ एक साथ रहते ही नहीं हैं बल्कि उनके कई सारे दोस्त भी हैं और वे खुल कर ज़िंदगी बिताते हैं।
ये दोनों अपनी जिंदगी को ऐसे खुल कर जीती हैं, जैसे कोई लड़का और लड़की वाला कपल जी रहा हो। और मुझे लगता है इस तरह से असल जिंदगी में होना फ़िलहाल असंभव है यही वजह है कि मुझे यह स्टोरी राइटिंग की एक बड़ी चूक महसूस हुई,हालाँकि फिल्म को लंदन में इसी लिए सेट किया गया है ताकि इसे सही ठहराया जा सके।
अगर इस फिल्म में लेस्बियन वाला कांसेप्ट ना दिखाकर नॉर्मल लड़का और लड़की वाला कपल दिखाया जाता, तब भी इसकी कहानी पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ता। यही वजह है कि मुझे लगता है, इस लेस्बियन वाले कॉन्सेप्ट को मेकर्स ने जबरदस्ती ठूंसा है।
मूवी में जिस तरह से मीरा के किरदार को कमजोर और बेचारा दिखाया गया है, वह बिल्कुल भी सूटेबल नहीं लगता। क्योंकि मीरा को काफी इमोशनल लड़की के रूप में प्रेजेंट किया गया है। हालांकि वह भी एक सेल्फ डिपेंडेंट है उसके बावजूद भी इस तरह दिखाना बिल्कुल भी तार्किक नहीं लगता।
फिल्म का अंत यानी इसके क्लाइमैक्स को जिस तरह से प्रेजेंट किया गया है, यह मुझे खासा प्रभावित नहीं कर सका। क्योंकि जिस तरह से फर्स्ट हाफ और सेकंड हाफ कहानी को बिल्ड अप करते हुए अंत तक लेकर आते हैं, तो इसके क्लाइमैक्स को भी उसी तरह से और भी अच्छा होना चाहिए था।
लेकिन इसका अंत देखते वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे सभी चीजों को बहुत ही नॉर्मलाइज तरीके से खत्म कर दिया गया, बिना ड्रामा क्रिएट किए हुए। पर मुझे लगता है लेखक यहां एक बात भूल गया कि उसने किसी फिल्म की स्टोरी को लिखा है और फिल्म में भी ड्रामा मौजूद होता है।
एक्यूज्ड फिल्म में क्या है खासियतें
स्टोरी दिखाया गया मीरा का किरदार भले ही काफी इमोशनल कैरेक्टर के रूप में दिखाई देता हो, लेकिन जिस तरह से उनके कॉस्ट्यूम को डिजाइन किया गया है वह बेहतरीन है।
जहां उनके हर एक सीन में जिस तरह से अलग-अलग तरह के रंगीन स्वेटर पहने हुए वह दिखाई देती हैं, वह लाजवाब है। यही वजह है कि यहाँ वह गजब की खूबसूरत लगती हैं।
फिल्म की लंबाई 1 घंटा 47 मिनट के भीतर रखी गई है, जो मुझे लगता है मेकर्स का एक बेहतरीन फैसला रहा। क्योंकि कहानी को इससे ज्यादा लेंथ में खींचना इस फिल्म के लिए घातक साबित हो सकता था।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी हो या फिर लोकेशंस सभी चीजें उम्दा हैं। खास करके सभी दृश्य जिन्हें आउटडोर में शूट किया गया है।
फिल्म में वर्क कल्चर की सच्चाई को भी दिखाने की कोशिश की गई है जहां पर भले ही कोई कितने भी बड़े पद पर मौजूद हो लेकिन फिर भी आपस में एक साथ काम करने वाले एम्प्लॉइज के बीच कोई न कोई छोटे-मोटे मतभेद हमेशा पनपते रहते हैं।
निष्कर्ष: देखें या नहीं?
अगर आप इस वीकेंड ओटीटी पर कुछ ऐसा देखने की तलाश में हैं, जो कम समय में हल्का फुल्का थ्रिलर और सस्पेंस देकर एक टाइमपास फिल्म भी साबित हो तब नेटफ्लिक्स की फिल्म एक्यूज्ड आपके लिए रिकमेंड की जा सकती है।
इस फिल्म में भले ही लेस्बियन वाले एक काफी सीरियस मुद्दे को प्रेजेंट किया गया हो लेकिन फिर भी कहानी में किसी भी तरह का एडल्ट सीन देखने को नहीं मिलता है। लेकिन यह बात आप पर डिपेंड करती है कि इस तरह के सब्जेक्ट पर बनी फिल्म आप अपनी फैमिली के साथ देखना चाहेंगे या फिर नहीं।
रेटिंग: 3/5
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