6 फरवरी 2025 के दिन सिनेमाघर में एक नई फिल्म रिलीज हुई है, जिसका नाम है “भाभी जी घर पर है: फन ऑन द रन”। हालांकि आमतौर पर यह देखा गया है कि जब भी कोई फिल्म थिएटर्स में दस्तक देती है,
तब उसे या तो बहुत ही अच्छा कहा जाता है या फिर एवरेज, लेकिन इन सब बातों से एकदम उलट भाभी जी घर पर हैं फिल्म को एकदम खराब और बकवास बताया जा रहा है।
यह फिल्म &Pictures नाम के टीवी चैनल पर डेली प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ से इंस्पायर्ड है। लेकिन क्या वजह रह गई की एक सुपरहिट सीरियल वाली कहानी को बड़े पर्दे पर उतरने के बाद क्यों यह धराशायी हो गई, चलिए जानते हैं हमारे रिव्यू आर्टिकल में।
भाभी जी घर पर हैं फिल्म की कहानी
इस फिल्म की कहानी शुरू होती है ठीक उसी तरह जैसे भाभी जी घर पर हैं, टीवी शो में दिखाई जाती है। जहां पर अंगूरी भाभी (शुभांगी आत्रे) अपने मस्त मगन अंदाज में घर के भीतर दिखाई देती हैं, तभी वहां विभूति नारायण मिश्रा (आसिफ शेख) एंट्री मारते हैं और अपने उसी मसालेदार मनचले अंदाज में अंगूरी भाभी से बातचीत करते हुए दिखाई देते हैं।
लेकिन इसी बीच बातों ही बातों में अंगूरी बताती हैं कि बीते दिन उनकी झड़प एक सड़क छाप गुंडे से हुई, लेकिन उनके पति यानी तिवारी जी (रोहिताश गौड़) ने उस गुंडे से लड़ने के बजाय अंगूरी का हाथ पकड़ कर उन्हें घर जाने के लिए बोल दिया। यह सब कहते हुए वह इमोशनल भी हो गई,
और कहने लगी कि वह अपने पति को उत्तराखंड में मौजूद एक मंदिर पर ले जाना चाहती हैं जहां पर जो भी जाता है वह शक्तिशाली हो जाता है। हालांकि बाद में अंगूरी यह भी कहती है कि तिवारी जी वहां जाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं होंगे क्योंकि वह काफी व्यस्त रहते हैं।
यह पूरी बात सुनते ही विभूति नारायण मिश्रा, झट से अंगूरी भाभी से कहता है कि वह उसे उत्तराखंड के उस मंदिर में ले जाएगा, हालांकि विभूति का मुख्य मकसद भाभी जी को मंदिर में ले जाना नहीं बल्कि उनके साथ अकेले समय बिताना होता है।
खैर इसी बीच टीका राम (वैभव माथुर) और मलखान सिंह (स्वर्गीय दीपेश भान) की कहानी को भी दिखाया जाता है, जो बेरोजगार हैं और रोजगार पाने की तलाश में, शहर के एक बड़े बिजनेसमैन (दिनेश लाल यादव) से टैक्सी किराए पर लेते हैं, जिससे वह उस टैक्सी को किराए पर चला कर पैसे कमा सकें और अपनी जिंदगी बिता सकें।
अब क्योंकि तिवारी जी एक टैक्सी का इंतजाम करने में जुटे हुए थे इसी दौरान वह टीका और मलखान से टकरा जाते हैं और पैसे का लालच देकर उनसे टैक्सी किराए पर ले लेते हैं, हालांकि वह इन दोनों के सामने एक शर्त भी रखते हैं की टैक्सी को वह अकेले ही लेकर जाएंगे।
शुरू में टीका और मलखान, विभूति की बातों पर विश्वास नहीं करते लेकिन सामने मौजूद शराब की दुकान को देखकर पिघल जाते हैं और विभूति से पैसे लेकर उसे गाड़ी की चाबी दे देते हैं। और जैसे ही गाड़ी की चाबी विभूति के हाथ में आती है वह तुरंत ही अंगूरी को लेकर उत्तराखंड की ओर निकल जाता है,क्योंकि शाम होते होते उसे वापस भी आना था, जिससे अंगूरी के पति तिवारी को इस यात्रा के बारे में पता ना चल सके।
हालांकि जैसे-जैसे यह कहानी आगे बढ़ती है और उत्तराखंड नजदीक आने लगता है इसी दौरान इन पर एक विधायक जी की नजर पड़ती है और यह किरदार शान्ति ‘रवि किशन’ ने निभाया है। जिन्होंने हाल ही में अपना हेयर ट्रांसप्लांट करवाया यानी नकली बाल लगवाए हैं, और इस बात को लेकर विधायक जी काफी खुश हैं, क्योंकि यह उनका एक मुख्य सपना था, कि उनके सिर पर भी बाल हों।
और जैसे ही विधायक भाभी जी को देखता है उसे अंगूरी भाभी से पहली ही नजर वाला प्यार हो जाता है। और वह अंगूरी और विभूति के पीछे पड़ जाता है, अब क्या यह दोनों इस रसूखदार और मनचले विधायक से बचकर सही सलामत घर वापस लौट पाते हैं या नहीं यह सब जानने के लिए आपको देखनी होगी यह फिल्म।
कैसा है शशांक बाली का निर्देशन
डायरेक्टर शशांक बाली, जो कि इससे पहले टीवी चैनल ‘सब टीवी’ के फेमस सीरियल F.I.R, ‘जीजा जी छत पर हैं’ और &पिक्चर्स के सुपरहिट धारावाहिक भाभी जी घर पर हैं, का निर्देशन कर चुके हैं और अब अपने भाभी जी घर पर हैं सीरियल की कहानी को बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। और मेरा मानना है कि फिल्म “भाभी जी घर पर हैं: फन ऑन द रन” भी ठीक वैसे ही है जैसे इसका धारावाहिक अवतार है।
हालांकि बहुत सारे क्रिटिक्स को यह फिल्म बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रही है, और मुझे लगता है यह बिल्कुल सही भी है क्योंकि इस तरह की स्टोरी लाइन और डायलॉग, एक धारावाहिक के लिए तो काफी होते हैं लेकिन किसी फिल्म में इस तरह की चीजों को दिखाना बिल्कुल भी सही नहीं है।
विभूति और तिवारी की जुगलबंदी
फिल्म की कहानी में भी उसी तरह से हंसी मजाक नोक झोंक और ठरकी रोमांस को दिखाया गया है, जैसे विभूति और तिवारी सीरियल में करते हैं। हालांकि धारावाहिक में कुछ मर्यादा में रहकर डायलॉग डाले जाते हैं, लेकिन फिल्म में ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया गया और यही वजह है, कि इन दोनों किरदारों की तुकबंदी भी सिनेमाघर में बैठे दर्शकों के चेहरे पर स्माइल नहीं ला पाई।
फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
भाभी जी घर पर हैं फन ऑन द रन की कहानी धारावाहिक के हिसाब से तो बिल्कुल ठीक है, लेकिन फिल्म में जिस तरह से इसे एग्जीक्यूट किया गया वह एकदम सुतली बम जैसा है, क्योंकि देखने में तो यह तबाही लाने वाला लगता है लेकिन अंदर से पूरी तरह फुस्स हो जाता है।
फिल्म में बहुत सारे अश्लील और भद्दे डायलॉग की भरमार है जो की डबल मीनिंग होने के साथ साथ बहुत गंदे भी हैं। जैसे की वह डायलॉग जब तिवारी को सांप काट लेता है, क्योंकि वह अपना पेट साफ करने के लिए जंगल में शौच के लिए जाता है लेकिन इसी दौरान उसे सांप काट लेता है, और तभी इस सांप का जहर निकालते वक्त एक डायलॉग बोला जाता है कि ‘कौन से मुंह की बात कर रहे हो’, इसी तरह के बहुत से अन्य डायलॉग भी फिल्म में डाले गए हैं ।
फिल्म की तीसरी सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें ‘सौम्या टंडन’ यानी अनिता भाभी के किरदार में ‘विदिशा श्रीवास्तव’ को लिया गया है, जिसकी वजह से उस तरह का सीरियल वाला अटैचमेंट दर्शक फिल्म में अनिता भाभी वाले किरदार से नहीं कर पाएंगे।
फिल्म के पॉजिटिव पहलू
कुछ चीजें हैं जो इस फिल्म को इसके धारावाहिक वर्जन से थोड़ा अलग बनाती हैं, जैसे भोजपुरी एक्टर और सांसद रवि किशन की एक्टिंग, साथ ही फिल्म में कॉमेडी का तड़का लगाने के लिए ‘मुकेश तिवारी’ को रवि किशन के भाई यानी ‘क्रांति’ के किरदार में लिया गया है, जिन्होंने अपने जीवन काल में बहुत सारी सुपरहिट, सीरियस और कॉमेडी फिल्मों में बतौर सहायक किरदार में काम किया है, और भाभी जी घर पर हैं फन ऑन द रन फिल्म में भी उनका काम बढ़िया है।
निष्कर्ष: फिल्म को देखें या नहीं?
जहां तक मेरी पर्सनल राय है तो मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि अगर आप भाभी जी घर पर हैं टीवी सीरियल को मौज लेकर देखते हैं, और किसी फिल्म को देखते वक्त उस की कहानी में लॉजिक नहीं ढूंढते हैं, तब “भाभी जी घर पर हैं फन ऑन द रन” फिल्म आपके लिए एकदम परफेक्ट है क्योंकि यहां भी उसी तरह का तालमेल देखने को मिलता है। हां बस कुछ एक्स्ट्रा फिल्मी कलाकारों के साथ में।
पर अगर आपने भाभी जी घर पर है सीरियल को नहीं देखा है तो आप इस फिल्म को इग्नोर कर सकते हैं क्योंकि इसमें बहुत सारे डबल मीनिंग डायलॉग्स है और पैरेंटल गाइडलाइन के हिसाब से कहूं तो इस फिल्म को अगर अपने परिवार के साथ देखेंगे तो यह आपको असहज महसूस करा सकती है।
रेटिंग: 3/5
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