Vadh 2 Review: ‘वध 2’ क्या ये सीक्वल पहली फिल्म से बेहतर है?

Vadh 2 Review: वध 2 (2026) का पूरा ईमानदार रिव्यू! क्या संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की नई फिल्म वध 2 पहली फिल्म वध को टक्कर दे पाई या उससे बेहतर है?

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February 11, 2026 11:11 AM (IST)
vadh 2 review in hindi

6 फरवरी 2026 के दिन भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म वध 2 इस फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्म वध को टक्कर दे पाई या नहीं?। डायरेक्टर जसपाल सिंह संधू के निर्देशन और स्टोरी राइटिंग में बनी फिल्म वध 2 के मुख्य किरदारों में संजय मिश्रा, नीना गुप्ता, कुमुद मिश्रा, शिल्पा शुक्ला और अमित सिंह जैसे कई बढ़िया कलाकार नजर आते हैं।

तो चलिए जानते हैं कि वध 2 अपनी स्टोरी के साथ न्याय कर पाई या नहीं और करते हैं इसका रिव्यू।

वध 2 की स्टोरी लाइन (बिना स्पॉइलर्स)

फिल्म की कहानी शुरू होती है मंजू सिंह (नीना गुप्ता) नाम की एक कैदी से, जो काफी लंबे समय से महिला कारागार यानी जेल में बंद है और उम्रकैद की सजा काट रही है। हालांकि जिस मर्डर की वह सजा काट रही है उस पर भी सवालिया निशान उठते हैं, जो आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चलेंगे।

वहीं दूसरी ओर शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) हैं, जो महिला जेल के पास ही बने पुरुष कारागार में पुलिस की ड्यूटी करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है शंभूनाथ महिला कारागार में मौजूद मंजू से जा टकराते हैं।

कहानी के आगे बढ़ने पर इन दोनों कारागारों में नए जेलर की एंट्री होती है। यह नए जेलर वाला किरदार प्रकाश सिंह (कुमुद मिश्रा) ने निभाया है। प्रकाश का स्वभाव काफी बीमार मानसिकता वाला है, क्योंकि वह भले ही जेलर जैसे बड़े पद पर है लेकिन फिर भी जात-पात और ऊँच-नीच जैसी चीजों से उसका दिमाग पूरी तरह भरा हुआ है।

हालांकि यह कहानी सुनने में जितनी सिंपल लग रही है, देखने में उससे कहीं ज्यादा दिमाग को झकझोरने वाली है। क्योंकि इसी बीच पुरुष जेल में पुलिस की सख्त नाकाबंदी के बावजूद एक कैदी का मर्डर हो जाता है। और इसी मर्डर केस की छानबीन करने के लिए इंस्पेक्टर अतीत सिंह (अमित सिंह) नाम के स्पेशल ऑफिसर को जांच के लिए जेल में भेजा जाता है,जो अपने काम में पूरी तरह कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार हैं।

अब क्या इंस्पेक्टर अतीत इस मर्डर की गुत्थी को सुलझा पाएंगे या नहीं? और क्या इस फिल्म का अंत दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरता है या नहीं? यह सब जानने के लिए आपको वध 2 देखनी होगी।

डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी में जेल की पृष्ठभूमि का असली एहसास

फिल्म वध 2 की पूरी कहानी जेल के अंदर ही फिल्माई गई है, जिससे दर्शकों की जेल के माहौल से पूरी तरह बॉन्डिंग बन सके। और मेरा मानना है कि डायरेक्टर जसपाल सिंह अपने इस डायरेक्शन में सफल भी रहे हैं।

जैसा कि फिल्म में एक सीन है, जब कांस्टेबल नदीम खान, जो काफी लंबे समय से कारागार में ड्यूटी कर रहा है, लेकिन फिर भी वह जेल में बंद विधायक के भाई को किसी वीआईपी से कम नहीं समझता। इसी तरह के बहुत सारे सीन वध 2 में देखने को मिलते हैं, जो असल दुनिया की सच्चाई से एकदम करीब लगते हैं।

नीना गुप्ता और संजय मिश्रा की एक्टिंग

वध फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्म 9 दिसंबर 2022 को रिलीज हुई थी, जिसमें नीना गुप्ता और संजय मिश्रा दोनों ही मौजूद थे। हालांकि वध 2 की कहानी पिछली फिल्म से बिल्कुल अलग है।

लेकिन कहानी भले ही नए सिरे से शुरू हुई हो, फिर भी वध फिल्म वाला एहसास वध 2 में देखते वक्त बना रहता है। संजय मिश्रा और नीना गुप्ता के बीच जो बॉन्डिंग फिल्म में दिखती है वह काफी पाक है।

जहां एक ओर शंभूनाथ मिश्रा हैं, जो मेहनत से दिन-रात अपनी पुलिस ड्यूटी करते हैं और बेटे को विदेश पढ़ने भेजते हैं, लेकिन बाद में वही बेटा उन्हें एक भारी भरकम लोन के साथ छोड़ देता है। और इसी लोन को चुकाने के लिए शंभूनाथ ड्यूटी के साथ-साथ जेल में मौजूद सब्जियों को चुपके-छुपके जेल के बाहर अपनी दुकान पर बेचते हैं ताकि लोन जल्दी चुकता हो जाए।

वहीं दूसरी तरफ नीना गुप्ता हैं, जो अपनी बीती हुई जिंदगी से पूरी तरह टूटी हुई हैं और उसी टूटी जिंदगी को समेटने के लिए वे जेल में ही परिवार जैसा माहौल बना चुकी हैं। जिससे वे हर रात कुछ पैसे देकर अपने बैरक से बाहर जा सकती हैं और जेल में मौजूद अन्य कैदी महिलाओं की जरूरत का सामान भी उन्हें मुहैया कराती हैं।

फिल्म का नेगेटिव पॉइंट

वध 2 एक अलग तरह की सीरियस क्राइम ड्रामा फिल्म है, इसलिए इसमें कोई गाना नहीं है।
कहानी भले ही ज्यादातर चीजों में अच्छी है, लेकिन एक बड़ी कमी यह है कि फिल्म के अंत में नीना गुप्ता और संजय मिश्रा के रिश्ते पर ज्यादा रोशनी नहीं डाली गई है।

पॉजिटिव पॉइंट्स

  • वध 2 में भले ही कुछ नेगेटिव पॉइंट हों लेकिन बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो पॉजिटिव हैं और यही वजह है कि इसे मस्ट वॉच कहा जा सकता है।
  • जिस तरह जेल का वातावरण कैमरे में उतारा गया है, वह एकदम असली लगता है।
    फिल्म की कहानी काफी इंगेजिंग है, जो बिना किसी गाने और बिना ओवर ड्रामा के भी दर्शकों को अंत तक बांधे रखने की काबिलियत रखती है।
  • कहानी में जात-पात जैसे अहम मुद्दों को भी बहुत अच्छे से दिखाया गया है, जिससे साफ हो जाता है कि धर्म की आड़ में आज भी कुछ लोग कैसे घिरे हुए हैं।

निष्कर्ष

अगर आप सीरियस क्राइम ड्रामा वाली कहानियां देखना पसंद करते हैं और अपनी जिंदगी के 131 मिनट ऐसी फिल्म को दे सकते हैं, जिसमें भले ही कोई गाना न हो लेकिन शानदार कहानी जरूर हो, तो आप फिल्म वध 2 को जरूर देख सकते हैं।

रेटिंग: 3.5/5

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  • arslan khan is a author of oyeisfriday.com

    मैं अर्सलान खान हूँ। बॉलीवुड और OTT कंटेंट के गहन रिव्यू और विश्लेषण का शौक और विशेषज्ञता रखता हूँ। मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है, जिसमें फिल्म स्टडीज और क्रिटिसिज्म भी शामिल था। बीते समय में मुझे अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में काम करने का अनुभव रहा है। और अब मै Oyeisfriday पर बेबाक और गहराई वाले रिव्यूज़ लिखता हूँ,फिर चाहे फिल्म हो या वेब सीरीज।

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