1 जनवरी 2026 को अविनाश तिरुवेदुलु के निर्देशन में बनी फिल्म “वनवीरा” (Vanaveera) सिनेमाघरों में तेलुगु भाषा के साथ रिलीज की गई थी जो एक एक्शन ड्रामा फिल्म है। यहां मुख्य कलाकार के रूप में अविनाश तिरुवेदुलु और सिमरन चौधरी दिखाई दे रहे हैं वहीं विलेन के रूप में है नंदू।
यह फिल्म एक्शन के साथ-साथ माइथोलॉजिकल एलिमेंट्स को भी पेश करती है जहां हनुमान और रावण को मॉडर्न तरीके से दिखाने की कोशिश की गई। फिल्म का बजट बहुत बड़ा नहीं है, पर इसकी सिनेमैटोग्राफी काफी शानदार की गई है।
फाइनली अब इसे प्राइम वीडियो के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हिंदी डबिंग के साथ स्ट्रीम कर दिया गया है। आईएमडीबी रेटिंग की बात करें तो वनवीरा की 6.2 आउट ऑफ 10 की रेटिंग है।
वनवीरा कहानी का बेसिक प्लॉट
यहां रघु नाम के एक लड़के की कहानी दिखाई गई है, जिसे अपनी बाइक से बेहद प्यार है। रघु कोई काम-धाम नहीं करता, यह एक लापरवाह लड़का है। गांव में इलेक्शन हो रहे हैं और इस इलेक्शन के दौरान रघु की बाइक को जबरन चुनाव में इस्तेमाल करने के लिए ले लिया जाता है।
इस बाइक को पाने के लिए रघु परेशान है और अब वह इसे वापस पाने के लिए पार्टी का कार्यकर्ता भी बन जाता है। लेकिन रघु जब राजनेता के घर में कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहा होता है, तब उसे वहां पता लगता है कि वह राजनेता जाति-पाति, ऊंच-नीच पर भरोसा करता है।
यहां फिल्म जातिवाद, अपने पावर का गलत इस्तेमाल और पॉलिटिक्स की गंदगी को अच्छी तरह से दिखाती है। कहानी का अंत इमोशनल मूवमेंट और माइथोलॉजिकल रूप में किया गया है।
आखिर क्या है खास वनवीरा में
2 घंटे 7 मिनट के रनिंग टाइम वाली इस फिल्म की हिंदी डबिंग अच्छे से की गई है। मुझे ऐसा लगता है कि गानों की डबिंग अगर ना भी की जाती तब भी चलता। यह छोटे बजट की फिल्म है जिसको परिवार के साथ भी बैठकर देखा जा सकता है क्योंकि यहां ऐसा कुछ भी नहीं है जो वल्गर लगे।
अगर आपको भी अपनी बाइक से बहुत प्यार है, तब हंड्रेड परसेंट वनवीरा आपको पसंद आएगी। कहानी में ऐसा कुछ भी नया नहीं है जो इससे पहले किसी और फिल्म या वेब सीरीज में न देखा हो।
इस तरह की फिल्में बनती रहती हैं खासकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री में पर जिस तरह से इसे प्रेजेंट किया गया है वह इंगेजिंग रहता है जो शुरू से लेकर अंत तक दर्शकों को फिल्म से जोड़े रखता है। रोमांस को बहुत ज्यादा नहीं दिखाया गया है बस थोड़ा-बहुत ही देखने को मिलता है।
फिल्म के अंदर बहुत ज्यादा एक्शन तो नहीं है, जो भी एक्शन देखने को मिलते हैं, वह नॉर्मल एक्शन जैसे ही दर्शाए गए हैं। धर्म और कर्म की यह कहानी रामायण से जोड़कर दिखाई गई है, जहां हनुमान और रावण को आज के समय के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है।
फिल्म की शुरुआत में तो ऐसा लगता है कि यह “हनुमान” फिल्म जैसी होगी, पर यह उसके जैसी बिल्कुल भी नहीं है। नेगेटिव पॉइंट की बात करें तो यहां पर बहुत से ऐसे सीन हैं जो इलॉजिकल लगते हैं, जैसे कि रघु से उसकी बाइक छीनने वाला सीन।
पहले हाफ की तुलना में इसका दूसरा हिस्सा काफी अच्छा है। आप इसे बहुत ज्यादा उम्मीद लेकर न देखें। मुझे तो इस तरह की फिल्में पसंद आती हैं, इसलिए मैं इसे 3/5 स्टार की रेटिंग दूंगा।
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