बॉलीवुड वेब सीरीज ‘जामताड़ा’ और हॉलीवुड फिल्म ‘द बीकीपर’ को टक्कर देने आ गई है नेटफ्लिक्स पर एक नई थाई फिल्म जिसका नाम “द रेड लाइन” (The Red Line) है।इस मूवी का निर्देशन ‘सितिसिरी मोंगकोलसिरी’ ने किया है, जो इससे पहले ‘Girl from Nowhere’ जैसी चर्चित सीरीज और अन्य थ्रिलर प्रोजेक्ट्स बना चुके हैं।
वहीं इसके जॉनर की बात करें तो यह क्रिमिनल एक्टिविटीज, थ्रिलर और ड्रामा के अंतर्गत आता है। इस फिल्म की टोटल लंबाई 2 घंटे 15-16 मिनट के आसपास है।
द रेड लाइन स्टोरी: स्कैम का मायाजाल
ये कहानी मुख्य रूप से तीन महिलाओं की है जो फोन स्कैम (कॉल सेंटर स्कैम) का शिकार होती हैं, जिनके नाम- ओर्न (नित्था जिरायुंग्युर्न), फाई (एस्तेर सुप्रीलीला), और वॉल्वो (चुटिमा महोलाकुल) हैं। इनमें से एक प्रमुख किरदार फाई (Fai) नाम की एक औरत का है, जो पेशे से एक फिजियोथेरेपिस्ट है।
जिसका शादीशुदा जीवन खुशहाल चल रहा था पर वह नहीं जानती थी कि आने वाले दिनों में एक ऐसा मनहूस दिन भी आएगा जब फाई अपने दिमागी सुख शांति को गंवा बैठेगी।
क्योंकि एक सुबह फाई के पास एक अनजान पुलिस ऑफिसर का कॉल आता है जो उसके बैंक खातों में हो रही संदिग्ध एक्टिविटीज के बारे में बताता है, और कहता है कि उसका फिजियोथेरेपिस्ट वाला लाइसेंस भी इस वजह से छीन सकता है। फिर वह फाई को एक मैसेज भेजने की बात करता है जिसका रिप्लाई फाई को करना होता है।
और जैसे ही फाई उस मैसेज को एक्सेप्ट करती है, तुरंत ही उसके बैंक खाते में मौजूद सभी धनराशि पूरी तरह से खाली हो जाती है। यानी उसका बैंक अकाउंट स्कैमर्स द्वारा सफाचट कर दिया जाता है और वह अपनी जीवन भर की कमाई 9 लाख 70 हजार एक झटके में गवा बैठती है।
और जैसे जैसे वक्त बीतता है, फाई के दिमाग पर इस इंसिडेंट का असर कम होने के बजाय बढ़ता ही चला जाता है, क्योंकि वह खुद से ही नाराज थी कि इतनी बड़ी बेवकूफी वह पढ़े लिखे होने के बावजूद भी कैसे कर सकती है।
यह सिचुएशन इतनी ज्यादा खतरनाक हो जाती है, कि फाई को काउंसलिंग के लिए जाना पड़ता है और इस काउंसलिंग सेशन में इसी तरह के स्कैम के शिकार हुए अन्य लोग मौजूद होते हैं, जो अपने अपने साथ हुई घटनाओं के बारे में चर्चा करते हैं।
हालांकि जिस स्कैमर ने फाई के साथ जुर्म को अंजाम दिया था, उसने अपना नाम पुलिस ‘कर्नल वुट्टिचाई पानुचाक’ (Colonel Wuttichai Panuchak) बताया था। इस नाम को फाई भूल ही नहीं पा रही होती और नींद में भी वही सभी चीजें उसे याद आती रहती हैं, जैसे मानो फाई को हर वक्त कोई देख रहा हो।
और यही नहीं बल्कि इस घटना के बाद फाई की फैमिली लाइफ भी खराब होने लगती है, क्योंकि फाई और उसके पति के बीच अनबन होना शुरू हो जाती है, कभी खाने को लेकर तो कभी घर के रेंट बकाया होने की वजह से।
लेकिन इसी बीच कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब फाई सोशल मीडिया पर एक लड़की (वाववो) को देखती है जिसने अपनी दादी के साथ हुई इसी तरह की स्कैम के बारे में वीडियो के माध्यम से बताया था। तुरंत ही फाई उस लड़की से मिलने चली जाती है।
इस बार फाई के हाथों में पुख्ता सबूत तब हासिल होते हैं, जब उसे स्कैम का शिकार बूढ़ी दादी के मोबाइल में स्कैमर का नया मैसेज दिखाई देता है, जिस पर वह स्कैमर अभी एक्टिव है। तभी यह सभी मिलकर एक प्लान बनाते हैं जिससे स्कैमर को ट्रेस करके उस तक पहुंचा जा सके।
अब क्या फाई और बाकी महिलाएं फिल्म के अंत तक स्कैमर और उसके गैंग लीडर Aood का पता लगा सकेंगी या नहीं?
इन्हीं सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आपको देखनी होगी फिल्म द रेड लाइन, जो इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी कई सबटाइटल्स के साथ नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है।
मददगार O.J और उसके हैकिंग स्किल
फिल्म में वैसे तो कई बढ़िया सहायक कलाकार दिखाई देते हैं, लेकिन इनमें से एक ऐसा किरदार है, जो हैकर है जिसका नाम O.J (Tonhon Tantivejakul) है। भले ही यह लड़का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हैकिंग टूल्स की मदद से कई उल्टे सीधे काम करता हो, लेकिन जिस तरह से वह इन सभी स्कैम का शिकार हुई महिलाओं Orn, Fai और Wawwow की मदद करता है, वह सराहनीय है। यही वजह है कि आप इस किरदार से इमोशनली अटैच हो जाते हैं।
दिलचस्प कहानी और नए मोड़
आमतौर पर इस सब्जेक्ट पर बनी कई फिल्में रिलीज हो चुकी हैं, पर जिस तरह से ‘द रेड लाइन’ फिल्म में थ्रिल को दिखाया गया है और उसे हर एक मोड़ पर दिलचस्प बनाया गया है, वह काबिले तारीफ है। यही वजह है कि इस फिल्म को देखते वक्त आप इसे शुरू से अंत तक बंधे रहते हैं।
कमजोर पक्ष: जो खलते हैं
फिल्म में जिस तरह से इस स्कैम गैंग के अड्डे को दिखाया गया है वह काफी हाई-टेक है, लेकिन जिस तरह से फाई के इलाके की पुलिस अपना काम करती हुई दिखाई देती है, वह थोड़ा सा गड़बड़ लगता है, क्योंकि वह असली जैसा नहीं लगता। असल जिंदगी में पुलिस इस तरह काम नहीं करती वह काफी एक्टिव होती है।
एक और बड़ी कमी जो मुझे महसूस हुई वह इस फिल्म की लंबाई है, जिसे 2 घंटे 15-16 मिनट में रखा गया है। मुझे लगता है इसे डेढ़ घंटे के भीतर भी खत्म किया जा सकता था। क्योंकि 2 घंटे से ज्यादा होने की वजह से कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे कहानी को बेवजह खींचा जा रहा है।
मजबूत पक्ष: जो दिल जीत लेंगे
यह फिल्म उन लोगों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं, जिनके साथ असल जिंदगी में भी इसी तरह का स्कैम हुआ है। क्योंकि जिस तरह से कहानी सिचुएशंस को बिल्ड अप करती है, उसे देखकर आपको ऐसा महसूस होगा जैसे यह कहानी असल जिंदगी में चल रही हो। यहां हर एक घटना और हर एक तथ्य एकदम उसी सटीकता से दिखाया गया है, जैसे असली स्कैमर द्वारा असल जिंदगी में अंजाम दिया है।
फिल्म में कई सारे टेक्निकल चीजें भी दिखाई गई हैं जैसे (GPS Spoofing) अपनी असल लोकेशन को छुपाकर गलत या फेक लोकेशन दिखाना, फोन क्लोनिंग, डेटा ट्रैकिंग आदि। इसी तरह की कई नई टेक्निक्स को फिल्म में दिखाया गया है,इससे उन लोगों के बीच काफी अवेयरनेस फैलेगी, जो अभी इस स्कैम का शिकार नहीं हुए हैं। मैं इसके लिए इस फिल्म के मेकर्स की तारीफ करना चाहूंगा।
निष्कर्ष: देखें या नहीं?
अगर आपके साथ पहले कभी डिजिटल अरेस्ट या कॉलिंग वाला स्कैम हो चुका है, तब आपको यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। और अगर आपके साथ इस तरह का कोई स्कैम अभी तक नहीं हुआ है। तब भी मैं यह फिल्म जरूर देखने के लिए रिकमेंड करना चाहूंगा, क्योंकि इसे देखने के बाद आप कई सारी ऐसी बातों को समझ सकेंगे, जो आपको ठगने के लिए ऑनलाइन ठगों द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं।
रेटिंग: 3.5/5
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