The Dreadful Review: सोफी टर्नर की फिल्म ने किया निराश

The Dreadful Review: 15वीं सदी के बैकड्रॉप पर बनी 'The Dreadful' एक स्लो-बर्न हॉरर है। सोफी टर्नर की एक्टिंग और डरावने माहौल के बावजूद, कहानी में नयापन न होने के कारण यह फिल्म निराश करती है।

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February 22, 2026 8:24 AM (IST)
The Dreadful Movie Review Hindi

20 फरवरी 2026 को फिल्म “The Dreadful” रिलीज हुई। 1 घंटा 34 मिनट के रनिंग टाइम वाली इस फिल्म का जोनर स्लो-बर्न, एटमॉस्फेरिक और सुपरनैचुरल है। साथ ही इसे थ्रिलर सुपरनैचुरल हॉरर भी कह सकते हैं।

जिन दर्शकों को पुराने गाने डरावने जंगल और रहस्यमयी नाइट सिनेमैटोग्राफी पसंद है उनके लिए यह एक परफेक्ट फिल्म बन सकती है। चलिए जानते हैं अपने इस आर्टिकल के माध्यम से क्या खास है इस फिल्म के अंदर।

कहानी

कहानी की शुरुआत होती है वॉर ऑफ द रोजेस के दौर से, यानी कि 15वीं सदी का इंग्लैंड जहाँ चारों ओर लड़ाई चल रही है जिनमें सबसे ज्यादा गरीबों की मौत हो रही है। ऐनी जो अपनी सास के साथ शहर से दूर जंगल में बने एक छोटे से घर में रहती है। ऐनी का पति लड़ाई में शामिल होने के लिए गया हुआ है।

यह एक धार्मिक औरत है और अपने पति ‘सीमस’ के इंतजार में सालों से खाली पड़ी रोड की ओर देखती रहती है और जैसे-तैसे अपनी जिंदगी गुजार रही है।

एक दिन इसके बचपन का दोस्त जागो आता है और वह यह बताता है कि इसका पति युद्ध में मारा जा चुका है। ऐनी इस दुख की घड़ी में जागो के करीब आने लगती है। पर यह बात इसकी सास मोरवन को बिल्कुल भी पसंद नहीं आती।

फिल्म के अंदर मन के डर को दिखाया गया है ना कि जंप स्केयर। यहाँ लालच विश्वास और परिवार में टकराव देखने को मिलता है।

कहानी का ट्विस्ट यह है कि घोड़े पर बैठा हुआ एक रहस्यमयी नाइट फुल आर्मर में, सफेद घोड़े पर सवार, लोगों को मार कर चला जाता है।

धीरे-धीरे यह आदमी उनकी तरफ बढ़ रहा है। फिल्म के अंदर जब-जब घोड़े पर बैठा हुआ आदमी दिखाया जाता है, वह पूरा सीन डर से भरा हुआ होता है। जोकि शापित हेलमेट या राक्षसी शूरवीर से जुड़ा है, ठीक फिल्म ‘Onibaba’ की तरह, जहां श्राप लोगों को प्रभावित करता है।

टेक्निकल पॉइंट

सोफी टर्नर और मोरवन दोनों की एक्टिंग को अगर कंपेयर किया जाए तो इन दोनों में मोरवन ने शानदार एक्टिंग की है। बाकी सभी कलाकारों ने भी यहाँ पर अच्छा परफॉरमेंस दिया है।

तो परफॉर्मेंस के मामले में इस पूरी फिल्म के सभी एक्टरों ने अच्छा काम किया है। मुझे जो यहाँ सबसे बड़ी कमी लगी वो ये थी कि मेकर्स को इसमें साइकोलॉजिकल हॉरर डालने की जरूरत नहीं थी, इसे नॉर्मल हॉरर के जैसे ही दिखाना था।

साथ ही अगर थोड़ी-थोड़ी देर में रोमांचक ट्विस्ट और टर्न इसमें डाले जाते, तो शायद इसको और भी अच्छे से पेश किया जा सकता था। कहानी में बिल्कुल नयापन नहीं है।

वही पुरानी बाबा आदम के जमाने की कहानी को फिल्म के अंदर प्रस्तुत किया गया है, जो थोड़ा सा भी नया एक्सपीरियंस नहीं देती। मैं एक प्रो फिल्मी हूँ, मेरा काम है इस तरह की फिल्मों को देखने का, तो मेरा एक्सपीरियंस इसे देखने के बाद यही रहा कि ये एक टाइम वेस्ट फिल्म है।

ट्रेलर को तो इस तरह से काटा गया था जिसे देखकर ऐसा लग रहा था कि यहाँ कुछ एडल्ट सीन्स भी देखने को मिलेंगे, तो फिल्म के अंदर ऐसा भी कुछ देखने को नहीं मिलता।

फिल्म में सोफी टर्नर और किट हैरिंगटन के बीच किसिंग और इंटिमेसी सीन हैं, लेकिन बहुत ज़्यादा बोल्ड सीन देखनेको नहीं मलते।

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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