नेहा धूपिया की मुख्य भूमिका वाली फिल्म जिसका नाम “सिसकियां” है, साल 2005 में रिलीज हुई ये एक ऐसी फिल्म है, जिसे अगर हिडेन जेम कहा जाये तो गलत नहीं होगा।
इस फिल्म के डायरेक्टर हैं, ‘अश्विनी चौधरी’ जिन्होंने लाडो, धूप, रिश्तो का चक्रव्यूह और ज़िंदगी खट्टी मीठी जैसी फिल्मों और शोज को डायरेक्शन दिया है।
यह सभी फिल्में और शो हाईएस्ट रेटिंग हैं लेकिन सिसकियां, अश्विनी चौधरी के डायरेक्शन में बनी एक एसी फिल्म है जिसे अंडररेटेड लेकिन मस्ट वॉच कैटेगरी की फिल्म कहा जा सकता है। जिसका कंटेंट इतना ज्यादा मीनिंगफुल है, कि जब आप इसे एक बार देखना शुरू करेंगे तो लास्ट तक देखना चाहेंगे।
थ्रिलर से भरपूर इस फिल्म की पूरी कहानी जानने के लिए आपको अपना 2 घंटा 5 मिनट का समय देना होगा। इंटेंसिटी और थ्रिलर से भरपूर इस फिल्म की कहानी लिखी है ‘संजय चौहान’ और ‘निदा फाजली’ ने।
वहीं अगर बात करें फिल्म के मुख्य कलाकारों की तो नेहा धूपिया, सचिन खेड़कर,सोनू सूद और संजय चौहान जैसे कलाकारों की एक्टिंग देखने को मिलेगी।
आइये जानते हैं कैसी है “सिसकियां” फिल्म की कहानी और क्यों यह फिल्म एक छुपा हुआ रत्न कही जा रही है और क्या है इस फिल्म की खासियत, के इतने सालों बाद एक बार फिर इस फिल्म को याद किया जा रहा है।
सिसकियां फिल्म स्टोरी :
फिल्म की कहानी की शुरुआत बहुत ही मिस्टीरियस तरीके से होती है, जिसमें ‘आयेशा शेख’ (नेहा धूपिया) देखने को मिलेंगी, जो एक मुस्लिम न्यूजपेपर एडिटर जिसका नाम ‘जावेद’ (सचिन खेड़कर) है, की पत्नी का रोल निभा रही हैं।
फिल्म के शुरुआत से ही आपको एक बैकग्राउंड म्यूजिक सुनने को मिलेगा, जिसके थ्रू नेहा धूपिया के कुछ पिछले बैकड्रॉप को सामने लाने की कोशिश की जा रही है। शुरुआत के 10 से 15 मिनट कहानी का बिल्ड अप समझने में लग जायेंगे।
लेकिन जैसे ही आपके समझ में सब कुछ आने लगेगा, आप इस कहानी से पूरी तरह से कनेक्ट हो जाएंगे। फिल्म में आपको एक और मिस्टीरियस कहानी देखने को मिलेगी, जिसमें एक दंगे के दौरान लगे ‘राहत शिविर’ में आयेशा शेख जो घायल अवस्था में है इस शिविर में अपने इलाज के लिए भर्ती होती है।
लेकिन उस शिविर में तैनात एक डॉक्टर जो पूरे 3 दिन तक 14 बार आयेशा का रेप करता है, यही वजह है कि आयेशा का मानसिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है और बार-बार वह बहुत ज्यादा एग्रेसिव हो जाती है।
इसके साथ ही कहानी में उसके पति से जुड़ी कुछ रहस्य पूर्ण घटना भी दिखाई गई है जिसकी वजह से दोनों के बीच काफी ज्यादा मतभेद चल रहा होता है।
जैसे ही लगभग 15 से 20 मिनट की कहानी आगे बढ़ती है, इस कहानी में ‘डॉ.विश्वास’ (सोनू सूद) की एंट्री होती है, जो एक डॉक्टर दिखाया है, और जैसे ही आयेशा को इस बात का पता चलता है कि वह एक डॉक्टर है।
उसका पूरा शक बल्कि पूरी तरह से वह सोनू सूद को ही दोषी मान बैठती है और उससे बदला लेना चाहती है। इस फिल्म को देखकर आपको पता लगाना है कि क्या वास्तव में डॉ.विश्वास दोषी है या फिर सिर्फ आयेशा की मानसिक विकृति का नतीजा है।
इंटेंस ग्रिपिंग के साथ बनी फिल्म:
भले ही ‘सिसकियां’ फिल्म की कहानी को सिर्फ दो घंटे के समय में नरेट किया गया है, लेकिन इतने समय में जिस तरह से आपको कहानी के साथ कनेक्ट करने का ग्रिपिंग पावर दिखाया गया है, वह बहुत ही ज्यादा इंटेंस है।
फिल्म में सिर्फ तीन मुख्य कैरेक्टर ही देखने को मिलेंगे जिसमें एक तो खुद नेहा धूपिया हैं और बाकी दो में उसका पति और सोनू सूद शामिल है। कहानी इंटरेस्टिंग तब हो जाती है जब दोनों ही कैरेक्टर्स पर शक पूरी तरह से जाता है। और यह पता लगाना के आखिर असली दोषी कौन है बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है जो इस फिल्म का प्लस पॉइंट है।
1947 से कनेक्ट कर के दिखाई गई कहानी:
जैसे ही आप ‘सिसकियां’ फिल्म को आधे से थोड़ा ज्यादा देखेंगे तो आपको सब कुछ समझ में आ जाएगा, कि आखिर मेकर्स फिल्म में दिखाना क्या चाहते हैं जब किसी भी तरह का धर्म से जुड़ा दंगा देश में होता है, तो उसमें कोई भी हिंदू या मुस्लिम नहीं रह जाता है, बल्कि सब लोग एक दूसरे को पूरी तरह से दुश्मन की तरह देखते हैं किसी को भी कहीं पर बक्शना नहीं चाहते हैं।
क्या है निष्कर्ष, क्यों देखना चाहिए ये फिल्म?
कहानी के अंत में आपको पता चलेगा कि 1947 में हुए दंगे के बाद जो मुस्लिम लोग इंडिया में रह गए थे वह क्यों रह गए थे उन्हें देश छोड़कर चले जाना चाहिए था लेकिन जो रह गए हैं उनके साथ इसी तरह का व्यवहार होगा जैसा फिल्म में दिखाए गए मुस्लिम जोड़े के साथ किया गया है।
जिसे भारतीय नैतिकता के अनुसार देखा जाए तो गलत दिखाया गया है लेकिन कहानी का एग्जीक्यूशन इतनी बेहतरी के साथ किया गया है कि सिर्फ इसी वजह से आपको यह फिल्म देखनी चाहिए।
युटुब पर यह फिल्म बिल्कुल फ्री में अवेलेबल है जिसे आप इंजॉय कर सकते हैं अगर आपको इस तरह की धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा से जुड़ी फिल्में देखना पसंद है और सबसे ज्यादा प्लस पॉइंट यह है की फिल्म को बहुत ज्यादा मिस्टीरियस थ्रिलिंग वे में दिखाया गया है।
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