साल 1996 में शुरू हुआ हॉलीवुड फ्रेंचाइजी ‘स्क्रीम’ का सफर 2026 में भी जारी है। क्योंकि 27 फरवरी 2026 के दिन सिनेमाघरों में “स्क्रीम 7” (Scream 7) फिल्म को रिलीज किया गया है। यह फ्रेंचाइजी अब 2026 में अपने 30 साल पूरे कर चुकी है।
स्क्रीम 7 का निर्देशन इस बार ‘केविन विलियमसन‘ ने किया है। इसकी टोटल लंबाई तकरीबन 114 मिनट (1 घंटा 54 मिनट) के बीच है, वहीँ इसका जॉनर स्लैशर हॉरर, मिस्ट्री, थ्रिलर की कैटेगरी के अंतर्गत आता है।
तो क्या केविन विलियमसन द्वारा निर्देशित, स्क्रीम फ्रेंचाइजी की यह सातवीं किस्त, दर्शकों का समय डिजर्व करती है या फिर नहीं? चलिए जानते हैं हमारे इस मूवी के रिव्यू में।
स्क्रीम 7: 30 साल से जारी सफर
फिल्म स्क्रीम 7 की कहानी ‘सिडनी प्रेस्कॉट इवांस’ (नेवे कैंपबेल) के किरदार से होती है, जो अब इंडियाना राज्य में ‘पाइन ग्रोव’ नाम के एक नए शहर में आम जिंदगी बिता रही हैं। साथ ही अब वह पेशे से एक ‘कॉफी शॉप’ की मालिक बन गई है, इसके कैफे का नाम ‘द लिटिल लेट’ है।
सिडनी की शादी भी अब हो चुकी है और इसका पति कोई मामूली इंसान नहीं, बल्कि पाइन ग्रोव शहर का पुलिस ऑफ चीफ ‘मार्क इवांस’ (जोएल मैकहेल) है। साथ ही सिडनी की एक छोटी बेटी भी है जिसका नाम ‘टैटम इवांस’ (इसाबेल मे) है।
हालांकि सिडनी की बेटी और उसका पति सिडनी के खूनी अतीत से पूरी तरह अनजान है। यही वजह है कि यह परिवार शांति से अपनी जिंदगी गुज़ार रहा है। लेकिन यह शांति ज्यादा दिनों तक टिकी नहीं रहती, क्योंकि इस फिल्म की कहानी में एक खतरनाक मोड़ तब आता है।
जब सिडनी को बीती जिंदगी की तरह ही एक बार फिर से उसे एक अनजान शख्स का कॉल आता है। फोन पर मौजूद यह आवाज कोई मामूली नहीं, बल्कि उसी किलर “स्टू मार्शेर” (मैथ्यू लिलार्ड) से मेल खाती है, जिसे बीती जिंदगी में सिडनी मौत के घाट उतार चुकी थी।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है हमें पता चलता है, कि यह अनजान कॉल उसे पुराने कातिल किलर ने नहीं, बल्कि उसकी आवाज को क्लोन करके आई द्वारा बनाया गया है। और इन सबके पीछे कोई और है, जो सिडनी की खुशहाल जिंदगी में आग लगाना चाहता है।
फिल्म में एक पल ऐसा भी आता है जब यह नया किलर यानी ‘घोस्ट फेस’, सिडनी की बेटी टाइटन को किडनैप कर लेता है।
अब क्या सिडनी अपनी बेटी और परिवार को इस कातिल से सुरक्षित रख पाएगी?
या फिर सिडनी का पति भी इस गुत्थी से जुड़ा हुआ है?
कौन है यह AI के पीछे छुपा हुआ घोस्ट फेस वाला किलर ?
इन सभी बड़े सवालों के जवाब जानने के लिए आपको देखनी होगी फिल्म स्क्रीम 7।
फ्रेंचाइजी के इस सातवीं किस्त की बड़ी कमियां
भले ही यह फिल्म 30 सालों से लगातार अपना दबदबा बनाए हुए है, लेकिन इस बार भी ठीक उसी पैटर्न को फॉलो किया गया है, जो इस फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्में लेकर आती थी। जैसे की किलर का कॉल आना और बिना किसी ठोस मकसद के उसका अंत तक जीवित रहना।
फिल्म में AI टेक्नोलॉजी को दिखाया गया है, जिससे बार-बार एक खुनी किलर द्वारा कॉल की जाती है। लेकिन जिस तरह से इस AI कॉलिंग वाले फीचर को इसकी कहानी में इंप्लीमेंट किया गया है वह थोड़ा आशपष्ट लगता है।
क्योंकि हुबहू किसी की आवाज को कॉपी करना AI के लिए अब भी थोड़ा मुश्किल है, साथ ही इसके लिए कुशल तकनिकी बैकग्राउंड का होना भी जरूरी है, जो कि मुझे बिल्कुल भी नहीं लगता की इस फिल्म में दिखाए गए इस किलर का होता है।
सिडनी के घर के अंदर एक सुरक्षित कमरा पहले से ही मौजूद था, लेकिन फिर भी उसकी बेटी टैटम जानबूझकर किलर के हत्थे चढ़ जाती है, जो काफी में तार्किक महसूस होता है।
कहानी में डायलॉग राइटिंग काफी कमजोर है, जिसमें बहुत सारे डायलॉग काफी अधूरे और हल्के महसूस होते हैं, जैसे मानो उन्हें जल्दबाजी में लिखा गया हो।
क्यों देखें यह फिल्म?
फिल्म में सिडनी की पड़ोसन का भी एक एहम किरदार दिखाया गया है , जिसका नाम ‘जेसिका’ है यह किरदार ‘अन्ना कैंप’ ने निभाया है, ये काफी अजीब और दिलचस्प है क्योंकि इसे काफी अजीब तरह से किताबें पढ़ने का शौक है।
फिल्म की शुरुआत जिस तरह से टेंशन और सस्पेंस को बिल्ड करती है, वह काबिले तारीफ है। लेकिन साथ ही साथ यह उन दर्शकों को भी बांधे रखने में कामयाब होती है जिन्हें फिल्म में टेंशन के साथ कॉमेडी भी देखना पसंद है।
क्योंकि इसके डायरेक्टर ने काफी सोच समझ कर स्मार्ट मूव चला है, जिसमें थ्रिलर, सस्पेंस, हॉरर और कॉमेडी का सटीक मेल दिखाई देता है।
सिडनी के किरदार में दिखाई देने वाली ‘नेवे कैंपबेल’, जो इस फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्म में नजर आई थीं, और इस बार उन्होंने जिस तरह से ‘स्क्रीम 7’ में दोबारा वापसी की है वह लाजवाब है, साथ ही फैंस के लिए सच्चा ट्रिब्यूट भी साबित होती है।
निष्कर्ष: मेरा अंतिम फैसला
अगर आप इस तरह की साइकोलॉजिकल, हॉरर, थ्रिलर, सस्पेंस से भरी फिल्में देखना पसंद करते हैं और ‘स्क्रीम’ फ्रेंचाइजी से पिछले काफी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। तो ‘स्क्रीम 7’ आपको वही नॉस्टैल्जिया फील कराती है, जो 30 साल पहले शुरू हुआ था।
हां यकीनन इसकी कहानी में इस बार भी छोटी-मोटी कमियां जरूर शामिल हैं, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि यह फिल्म बढ़िया है।
रेटिंग: 3.5/5
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