अरुण विजय की ‘रेट्टा थाला‘ एक एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जिसे 18 फरवरी 2026 से, हिंदी भाषा के साथ अब ‘अल्ट्रा प्ले’ पर रिलीज़ कर दिया गया है। फिल्म का रनटाइम 1 घंटा 53 मिनट का है। अरुण विजय के साथ यहाँ सिद्धि इधनानी, तनया रविचंद्रन और जॉन विजय जैसे सपोर्टिंग एक्टर भी दिखाई दे रहे हैं।
अपराध और लालच से भरी हुई यह कहानी बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही थी। महज 4 करोड़ के बजट में बनी ‘रेट्टा थाला’ वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन में अपने बजट को रिकवर न कर सकी थी। चलिए जानते हैं इस फिल्म की कहानी और रिव्यू।
क्या है ‘रेट्टा थाला’ की कहानी?
अरुण विजय ‘काली’ के किरदार में हैं, जो एक अनाथ बच्चा है और पांडिचेरी की सड़कों पर बड़ा हुआ है। वह कई छोटे-मोटे काम करके अपनी जिंदगी गुजारता है। पांडिचेरी में ही उसकी एक दोस्त अंथिरे भी रहती है। अंथिरे का काली पर बहुत अहसान है।
क्योंकि बचपन में काली जब अपनी जिंदगी से परेशान होकर आत्महत्या करने जा रहा होता है, तब काली उसे बचाती है और जीवन की नई शुरुआत करने की प्रेरणा देती है।
कुछ समय के बाद काली को वापस पांडिचेरी लौटते हुए दिखाया जाता है, जहाँ वह अपनी प्रेमिका अंथिरे से मिलता है। पर अंथिरे काली से कहती है कि वह फ्रांस जा रही है, एक नई जिंदगी की शुरुआत करने।
काली उससे शादी करने को बोलता है, पर वह कहती है कि तुम्हारी जेब भी खाली है और मेरी जेब भी, ऐसे में हम दोनों शादी करें भी तो कैसे करें.
इसके बाद एक इलॉजिकल सीन दिखाया जाता है जहाँ काली को उपेंद्र नाम का अपने ही जैसा एक इंसान मिलता है जो कि एक खतरनाक गैंगस्टर है। उपेंद्र के पास बहुत पैसा है। तब काली और उसकी प्रेमिका एक प्लान बनाते हैं कि क्यों ना उपेंद्र को मार दिया जाए।
ताकि उसकी सारी दौलत पर हमारा कब्जा हो जाए। अपनी प्रेमिका की बात मानकर काली उपेंद्र के माथे पर गोली मार देता है। पर उसे नहीं पता था कि उपेंद्र को उसके दुश्मन ढूंढ रहे हैं जो कि अब उपेंद्र के मरने के बाद काली के दुश्मन बन जाएंगे।
मुझे क्लाइमैक्स के सीन से बहुत आशा थी पर इसने भी निराश किया। धोखे, लालच और बदले की इस कहानी को अगर आपको देखना है तो ‘अल्ट्रा प्ले’ के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अब इसे हिंदी में उपलब्ध करा दिया गया है।
कमजोर कहानी, कूलनेस दिखाने की कोशिश में हुई फेल
‘रेट्टा थाला’ फिल्म की स्क्रिप्ट बहुत कमजोर है। इसके मुख्य कैरेक्टर को ‘कूल’ बनाने के लिए बहुत मेहनत की गई है, पर बजट कम होने की वजह से मेकर्स की मेहनत रंग लाती नहीं दिखी। कहानी काफी स्लो पेस में आगे बढ़ती है जो बोरियत महसूस कराती है।
फिल्म में प्रेडिक्टिबल सीन की भरमार है। इन्हें देखने के लिए आपको अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करना है; क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है एक दर्शक के तौर पर हमें इस बारे में बिल्कुल नहीं सोचना है।
म्यूजिक और बीजीएम की बात की जाए तो वह भी निराशाजनक है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की अच्छी है, पर इस फिल्म की हिंदी डबिंग उतने अच्छे से नहीं की गई, जिसकी एक वजह इसका कम बजट होना भी हो सकती है।
बजट के हिसाब से देखें तो काफी अच्छी
‘रेट्टा थाला’ मूवी का बजट ४ करोड़ रूपये था, और इसके इण्डिया नेट कलेक्शन की बात करें तो, यह केवल 3.17-3.4 था। इसे देखते समय ऐसा लगता है कि फिल्म को जल्दबाजी में बनाया गया है। स्क्रिप्ट अच्छी थी, अगर बजट थोड़ा ज्यादा होता तो शायद इसे एक बेहतर फिल्म बनाया जा सकता था।
एक्शन में जिस तरह से स्टाइलिंग को मिक्स किया गया है, वह देखना मजेदार है। अरुण विजय का परफॉर्मेंस थोड़ा निराशाजनक है; फिल्म में वह लगते ही नहीं हैं कि हीरो हैं। मैं इसे २/५ स्टार रेट करूँगा।
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