Mercy Movie Review: क्रिस प्रैट को AI ने दोषी ठहराया? 90 मिनट में बेगुनाही साबित करो वरना मौत

Mercy Movie Review: क्रिस प्रैट की 'मर्सी' एक एआई आधारित साइंस-फिक्शन थ्रिलर है। इसमें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए संघर्ष करते डिटेक्टिव रेवन की कहानी को 90 मिनट के रोमांचक खेल में दिखाया गया है।

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February 18, 2026 11:31 AM (IST)
Mercy 2026 Movie Review hindi

थ्रिलर और साइंस फिक्शन के मजबूत जोड़ के साथ “मर्सी“, फिल्म को सिनेमाघर में रिलीज किया गया था। यह कहानी है आने वाले कल के न्याय-अन्याय की व्यवस्था पर जहाँ एआई टेक्नोलॉजी को भी अच्छे से पेश किया गया है।

कहानी में वैसे तो कोई नयापन नहीं है इस तरह की फिल्में पहले भी देखी जा चुकी हैं। जिन दर्शकों को प्रिडिक्टेबल फिल्में देखने का शौक नहीं है वो इससे दूरियाँ बनाकर चलें।

मुख्य किरदार के रूप में क्रिस प्रैट हैं, जिन्हें यहाँ एआई टेक्नोलॉजी के बड़े समर्थक के रूप में पेश किया गया है। पर कहानी का ट्विस्ट यह है कि क्रिस प्रैट अपनी ही पत्नी की हत्या के झूठे आरोप में फंस जाते हैं। आप इसे प्राइम वीडियो के VOD (वीओडी) यानी कि रेंटल पर, हिंदी डबिंग के साथ देख सकते हैं।

इंसानी जज्बात और मशीन का लॉजिक

कल्पना करें, कि आप एक ऐसे माहौल में रह रहे हैं, जहाँ न ही जज है और न ही पुलिस। यहाँ सिर्फ एक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसका नाम ‘मर्सी’ है और इस टेक्नोलॉजी को एआई सिस्टम संभाले हुए है।

अब ए.आई टेक्नोलॉजी है तो इससे भला कौन ही बच पाएगा यह जुर्म करने वालों को जुर्म करने से पहले पकड़ लेता है कौन दोषी है, कौन निर्दोष, आसानी से भांप सकता है। क्रिस प्रैट (डिटेक्टिव रेवन) का ऐसा मानना है, कि इस एआई सिस्टम को कोई फेल नहीं कर सकता, पर उन्हें क्या पता था कि उनके ही द्वारा चलाया जा रहा यह एआई सिस्टम उन्हें ही दोषी ठहरा देगा।

कहानी का सबसे अच्छा पहलू वह है, जब क्रिस प्रैट (डिटेक्टिव रेवन) को खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए 90 मिनट का टाइम दिया जाता है। अब इस दिमागी खेल में क्या क्रिस एआई सिस्टम से जीतता है या हारता?, यह जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी।

जो सबसे अच्छा लगा इस फिल्म में वह था इसका बीजीएम (BGM)। हालाँकि, मैं एक प्रो-फिल्मी होने के नाते इसे आसानी से आधी फिल्म के अंदर ही, इसके आगे की स्टोरी को प्रिडिक्ट कर चुका था।

क्या खास है फिल्म के अंदर

मेरा ऐसा मानना है कि जिन दर्शकों को तेजी के साथ चलने वाली कहानी देखना पसंद है उनके लिए यह एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यह एक मिस्ट्री थ्रिलर है जिसके अंदर साइंस फिक्शन को डाला गया है तब टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए दर्शकों को यह फिल्म काफी पसंद आने वाली है।

अगर आपने टॉम क्रूज की ‘माइनॉरिटी रिपोर्ट’ फिल्म को देखा होगा तो कुछ हद तक यह कहानी भी उसी तरह की है जिसे देखते समय आपको लॉजिक का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना है।

जिन्हें बिना दिमाग लगाए फिल्में देखने का शौक है, शायद उन्हें भी ये कहानी पसंद आए। ऐसी कहानी और कैरेक्टर आपस में मेल नहीं खाते। म्यूजिक, प्रोडक्शन वर्क, सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग शानदार है।

इस फिल्म को देखने के बाद आपको एक बात अच्छे से समझ में आ जाएगी, कि जब भी आप कुछ गलत काम कर रहे हों तो अपने मोबाइल का कैमरा हमेशा ढंक कर रखें।

फिल्म की कहानी में तब रोमांच आता है जब क्रिस खुद को एक कुर्सी पर बैठा हुआ पाता है और सामने होता है ए.आई जज। उसे मिलते हैं सिर्फ 99 मिनट अपनी बेगुनाही को साबित करने के लिए अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो वह 90 मिनट के अंदर मार दिया जाएगा।

निष्कर्ष

इस फिल्म का जितना अच्छा कॉन्सेप्ट था, उस तरह से यह कुछ अनोखा डिलीवर नहीं कर सकी। ‘मर्सी’ मूवी में एक्शन ना के बराबर है, एक कमरे के अंदर फिल्म खत्म हो जाती है। ज्यादातर फिल्म में फुटेज का इस्तेमाल किया गया है, रियल एक्शन ना दिखाकर।

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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