फिजिक्स वाला के संस्थापक ‘अलख पांडे’ के ऊपर TVF के प्रोडक्शन में बनी ‘हेलो बच्चों’ (Hello Bachhon) नाम की एक बायोपिक-इंस्पायर्ड वेब सीरीज बनाई गई है। जिसे Netflix पर 6 मार्च 2026 को रिलीज़ किया गया है।
हैलो बच्चों बायोपिक बनाने का मुख्य उद्देश्य अलख पांडे की संघर्ष की दास्तान को लोगों तक पहुँचाना है, साथ ही छात्रों की स्ट्रगल और उनके सपनों को भी दिखाना है। इससे पहले भी इसी तरह की बायोपिक मैरी कॉम और एम.एस. धोनी:द अनटोल्ड स्टोरी भी बनाई जा चुकी हैं।
तो यह जरूरी नहीं कि मरने के बाद ही किसी इंसान की बायोपिक बनाई जाए। इससे पहले भी Amazon मिनी टीवी पर ‘फिजिक्स वाला’ नाम की वेब सीरीज लाई जा चुकी है, जहाँ पर अलख पांडे का किरदार श्रीधर दुबे ने निभाया था।
यहाँ पर दिखाया गया था कि कैसे इन्होंने एक छोटी सी कोचिंग से एक बड़े कॉर्पोरेट तक का सफर तय किया। चलिए पता करते हैं अपने इस आर्टिकल के माध्यम से कि क्या यहाँ पर ‘Physics Wallah’ से कुछ अलग हटकर पांडे जी की कहानी के वो छुपे हुए पन्ने भी दिखाए गए हैं जो आज तक लोगों के सामने नहीं आए हैं।
हैलो बच्चों वेब सीरीज के अंदर जिस तरह से ‘फ़िज़िक्स वाला’ में अलख पांडे की जिंदगी के बारे में दिखाया गया था, यहाँ पर वो सब नहीं दिखाया गया है। यहाँ शुरुआत से ही दिखाया गया है, कि अलख पांडे (विनीत कुमार सिंह) अपने आप को मजबूत तरीके से खड़ा कर चुके हैं।
साथ ही दिखाया गया है कि उनके इंस्टीट्यूट से पढ़ रहे बच्चे अब भी किस तरह से स्ट्रगल कर रहे हैं। वेब सीरीज का नाम ‘हेलो बच्चों’ इसलिए रखा गया है,
क्योंकि यह अलख पांडे का सिग्नेचर स्टाइल है। इस सीरीज़ में कुल 5 एपिसोड्स दिखाए गए हैं, इन सभी पाँचों एपिसोड में अलग-अलग कहानी देखने को मिलती है।
अलख पांडे के किरदार में ‘विनीत कुमार सिंह’ हैं जो बड़े-बड़े कोचिंग के बड़े ऑफर को ठुकरा कर अपना खुद का इंस्टीट्यूट खड़ा करना चाहते हैं। साथ ही यहाँ दिखाया गया है पाँच बच्चों की कहानी को कि वे किस तरह से अपने जीवन में संघर्ष कर रहे हैं।
सीरीज़ में विक्रम कोचर ने प्रतीक माहेश्वरी का किरदार निभाया है, गिरिजा ओक गोडबोले ने अलख की बहन का रोल किया है।
हैलो बच्चों का पॉजिटिव पॉइंट क्या है?
वैसे तो ‘हेलो बच्चों’ को देखने के बाद इसमें कुछ नया जैसा देखने को नहीं मिला। अगर आपने ‘Kota Factory’ पहले ही देख रखी है, तब इसे देखते समय ‘कोटा फैक्ट्री’ और ‘फिजिक्स वाला’ की याद आ सकती है।
बच्चों को लेकर और उनके जीवन के बारे में शो में कई ऐसे सीन हैं जो सच में दिल को छू जाते हैं। फिर चाहे कितना भी कठोर दिल इंसान क्यों न हो अपनी आँखों से आँसुओं को नहीं रोक सकता।
बच्चों का स्ट्रगल गरीबी से, अपने आप से और समाज से मेकर के द्वारा बहुत अच्छे से पेश करने की कोशिश की गई है। वैसे तो अलख पांडे की कहानी को आप सब ने पहले ही सुना और देखा ही होगा,
पर हर बार उनकी कहानी को देखने में वो मजा आता है जो शायद ही किसी बायोपिक पर बनी वेब सीरीज को देखकर आए। विनीत कुमार सिंह के साथ यहाँ विक्रम कोचर भी हैं जिनका काम शानदार रहा।
हैलो बच्चों के नेगेटिव पॉइंट
वैसे तो इसके नेगेटिव पॉइंट्स बहुत कम हैं क्योंकि यहाँ पर दिखाया गया है किस तरह से बहुत से बच्चे फिजिक्स वाला की वजह से अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं।पर कुछ रिव्यूअर का ऐसा भी मानना है कि यह एक कॉर्पोरेट के द्वारा बनाई गई वेब सीरीज है।
जैसे कि ‘Shark Tank’, जिस तरह से अलख पांडे को सीरीज के अंदर पेश किया गया है कि वह झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर नशे की प्रॉब्लम को भी सॉल्व करते हैं अब वो करते थे कि नहीं करते थे इसके बारे में उचित जानकारी तो मुझे नहीं है पर इसे देखकर यह जरूर लग रहा था कि यहाँ अलख पांडे को प्रमोट किया जा रहा है।
वेब सीरीज को देखते समय मेरे दिमाग में बस एक बात घूमती रही कि यह कहानी अलख पांडे के द्वारा Netflix पर अपने प्रमोशन के लिए बनाई गई वेब सीरीज तो नहीं है? मुझे नहीं पता कि यह ऐसा है भी या नहीं, पर मुझे लगा ऐसा कि शायद यह एक एजेंडे के तौर पर ही बनाई गई वेब सीरीज है।
निष्कर्ष
अलख पांडे ने अपनी जिंदगी में जिस तरह से स्ट्रगल किया है उन सब से हम वाकिफ हैं और इसकी प्रशंसा भी करते हैं। हैलो बच्चों में किसी भी तरह की कमी नहीं है यह बोर नहीं करती है।
इसे अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं। साथ ही यह वेब सीरीज निराशा में आशा ढूँढती है। मनोरंजन के तौर पर इसे आप एक बार देख सकते हैं। मैं इसे दूँगा पाँच में से तीन स्टार की रेटिंग।
READ MORE
With Love Movie Review: ऐसी लव स्टोरी जो पुराने जख्मों को फिर से ताजा कर देगी।










