Family Kirana Store TVF Review: फैमिली किराना स्टोर रिव्यू: क्या TVF इस बार चूक गया?

Family Kirana Store Review: टीवीएफ की 'फैमिली किराना स्टोर' एक छोटे दुकानदार के संघर्ष और ऑनलाइन रिटेल से मिलती चुनौतियों की कहानी है। अभिनय अच्छा है, लेकिन कमजोर राइटिंग और भाषाई तालमेल की कमी इसे औसत बनाती है।

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March 4, 2026 1:31 PM (IST)
Family Kirana Store TVF series scene: Shopkeeper with mustache behind kirana counter with jars of snacks, small-town family drama

फैमिली किराना स्टोर‘ TVF की नई वेब सीरीज है, जिसका पहला एपिसोड यूट्यूब पर बिल्कुल फ्री प्रसारित किया गया। अब इसके सभी 5 एपिसोड को ‘टीवीएफ‘ के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं और इन सभी शो की लंबाई 15 से 20 मिनट के बीच की है।

यहां कहानी देखने को मिलती है मिडिल क्लास छोटे शहर की एक छोटी फैमिली की जो कि घर में खुली एक छोटी किराना दुकान के इर्द-गिर्द घूमती रहती है।

मुख्य किरदार में यहां पर- श्रीकांत वर्मा, गरिमा विक्रांत सिंह और हेमंत मिश्रा दिखाई दे रहे हैं। शो को इस तरह से प्रस्तुत किया गया है, जो देखने में एकदम असल जिंदगी की कहानी लगती है।

फैमिली किराना स्टोर की क्या है बेसिक कहानी

यह कहानी एक छोटे से परिवार की दिखाई गई है, जिनकी किराने की दुकान है। गजानन अपनी किराने की दुकान को लेकर बहुत ज्यादा ऑब्सेस्ड है।

उनकी दुकान पर ग्राहक आना कम हो गए हैं। गजानन अपनी दुकान की तरफ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं।

पर इन कोशिशों के बीच बहुत सारी मुश्किलें भी आती हैं। गजानन यानी कि गज्जू भैया को अपनी दुकान से इतना प्यार है कि वह अपनी दुकान में ही लगे रहते हैं पर ऑनलाइन रिटेल होने से ग्राहक इनकी दुकान पर अब कम आने लगे हैं।

गज्जू भैया की मुश्किलें आसान नहीं हैं कभी उनके हाथ में जाली नोट आ जाता है तो कभी कोई ग्राहक दुकान से चोरी करने की कोशिश करता है।

कभी किसी के दाम बढ़ जाते हैं तो कभी किसी के दाम अचानक से गिर जाते हैं। इनकी दुकान उनकी कमाई के जरिए के साथ-साथ उनकी जिंदगी भी बन गई है।

सीरीज आपको हंसाने-रुलाने दोनों का काम करेगी। यहां पता चलता है कि असल में ग्राहक ही असली भगवान है या फिर कोई और। 5 एपिसोड की इस सीरीज को यूट्यूब पर फ्री में उपलब्ध कराया गया है ‘द वायरल फीवर’ (TVF) के ऑफिशियल चैनल पर।

क्या है इस वेब सीरीज में खास

यहां एक दुकानदार की कहानी दिखाई गई है, कि उसकी जिंदगी में दुकान को लेकर किस तरह की प्रॉब्लम्स आती हैं और वह उन्हें कैसे फेस करता है। इन्हीं सब बातों को 5 एपिसोड के अंदर रखकर पेश किया गया।

यह एक डीसेंट सीरीज है इसे ना तो बहुत अच्छा और ना ही बुरा बोला जा सकता है। बुरा लगता है जब आपका कोई कस्टमर आपके सामने वाली दुकान से सामान खरीदे और आपके पास ना आए।

जिस तरह गुल्लक की कहानी गढ़ी गई थी, ठीक वैसा ही इसकी कहानी को भी दिखाया गया है। गुल्लक के जैसे ही यहां पर भी हर एपिसोड में एक किस्सा दिखाया गया है। पर पिछली टीवीएफ की वेब सीरीज से अगर इसकी तुलना की जाए तो यह बहुत वीक है, इसकी कहानी में उतना दम नहीं।

वेब सीरीज के किसी भी कैरेक्टर से इमोशनल जुड़ाव नहीं हो पाता है क्योंकि हर कैरेक्टर को यहां पर बहुत कम टाइम दिया गया है। टीवीएफ की और वेब सीरीज को अगर देखें तो वहां हर एक कैरेक्टर को मजबूत टाइम मिलता है जिससे कि वह ह्यूमन-टू-ह्यूमन कनेक्शन जोड़ने में कामयाब रहता है।

वेब सीरीज में इमोशनल करने की कोशिश तो बहुत की पर किसी भी सीन को देखकर इमोशनली फील नहीं आता। राजस्थान की कहानी को देखकर उनके किरदारों को राजस्थानी भाषा बोलनी चाहिए थी पर यहां पर ये किरदार यूपी की भाषा बोलते हुए नजर आ रहे हैं। जो डेप्थ हम टीवीएफ की वेब सीरीज से एक्सपेक्ट करते हैं वह डेप्थ की यहां पर कमी है।

कमजोर राइटिंग है, पर आज के समय पर ऑनलाइन शॉपिंग के वक्त पर इस तरह की वेब सीरीज को लाना और बताना कि लोकल दुकानदारों की परेशानियां क्या-क्या हैं, अच्छी बात है। श्रीकांत वर्मा ने बहुत अच्छा काम किया है।

गरिमा सिंह का काम तो अच्छा है पर उनकी बोली ने डुबो दिया। बेटे के किरदार में हेमंत हैं, उनकी भी एक्टिंग बस ठीक-ठाक ही थी। वैशाली सिंह का काम अच्छा है। मेरी तरफ से इस सीरीज को दी जाती है 5 में से 2.5 स्टार की रेटिंग।

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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