Chiraiya Web Series Review: क्या शादी के बाद ‘No’ का मतलब ‘No’ नहीं होता? पढ़ें रिव्यू

संजय मिश्रा और दिव्या दत्ता अभिनीत 'चिरैया' वेब सीरीज रिव्यू (Chiraiya Review in Hindi)। शशांत शाह के निर्देशन में बनी यह सीरीज समाज की एक कड़वी सच्चाई को दिखाती है।

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March 23, 2026 6:39 PM (IST)
Chiraiya Web Series Review in Hindi

साल 2016 में अभिनेत्री तापसी पन्नू की एक फिल्म रिलीज हुई थी जिसका नाम ‘पिंक’ था, पिंक फिल्म का मुख्य आधार था कंसेंट यानी ‘No means no’। ठीक उसी आधार पर जियोहॉटस्टार लेकर आया है अपनी एक नई वेब सीरीज “चिरैया“। इस सीरीज में आपको टोटल 6 एपिसोड देखने को मिलेंगे जिसमें से हर एक एपिसोड की लंबाई तकरीबन 30 से 35 मिनट के बीच है।

बात करें इस सीरीज के डायरेक्टर की तो इसका निर्देशन ‘शशांत शाह’ ने किया है जो इससे पहले कई वेब सीरीज और फिल्में कर चुके हैं। चलिए जानते हैं इस सीरीज का डिटेल रिव्यू।

चिरैया वेब सीरीज की स्टोरी:

चिरैया वेब सीरीज लेखक की फैमिली के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां संजय मिश्रा ने लेखक का किरदार निभाया है। साथ ही इस परिवार में कई लोग मौजूद हैं जैसे कि दिव्या दत्ता, सिद्धार्थ शाह, फैसल रशीद और प्रसन्न बिष्ट।

दिव्या दत्ता कमलेश के किरदार में नजर आती हैं जो कि इस घर की बड़ी बहू हैं। जो अपने छोटे देवर अरुण की शादी के लिए लड़की देख रही हैं। इसी दौरान कमलेश के परिवार को पूजा नाम की लड़की पसंद आ जाती है और अरुण की शादी पूजा के साथ करवा दी जाती है लेकिन शादी के बाद पूजा और अरुण के बीच कुछ ऐसा होता है, जो एक काफी संवेदनशील मुद्दा है।

क्योंकि सुहागरात के दिन पूजा काफी बीमार होती है जिस वजह से वह अरुण को समझाने की कोशिश करती है कि वह बीमार है, हालाँकि लाख मना करने के बावजूद भी अरुण जबरदस्ती पूजा के साथ फिजिकल हो जाता है।

और अगली ही सुबह पता चलता है कि पूजा इस परिवार से गायब हो गई है यानी घर छोड़ कर चली गई है। सीरीज की आगे की कहानी इसी पर आधारित है कि शादी के बाद बीवी अपने पति की पर्सनल प्रॉपर्टी नहीं हो जाती, और पति और पत्नी को म्यूचुअल कंसेंट के साथ ही चीजें करनी चाहिए।

कैसा है निर्देशन:

सीरीज का डायरेक्शन शशांत शाह ने किया है और मुझे लगता है, कि इससे बेहतर निर्देशन नहीं किया जा सकता था। क्योंकि जिस तरह से उन्होंने असल दुनिया में मौजूद शादीशुदा औरतों की परेशानी को अपनी इस वेब सीरीज के माध्यम से दिखाने की कोशिश की है वह सराहनीय है।

सीरीज की 4 अच्छी चीजें:

अगर मैं अपने पर्सनल पॉइंट ऑफ व्यू से कहूं तो मुझे लगता है, कि जिस तरह से चिरैया वेब सीरीज में प्रसन्न बिष्ट ने पूजा के किरदार को निभाकर उसमें जान डाल दी है, वह लाजवाब है।

सीरीज में जिस तरह से दिव्या दत्ता ने कमलेश वाला किरदार निभाया है, वह भी सराहनीय है। जहां भले ही वह परिवार की बड़ी बहू हों लेकिन कहानी में एक मुख्य स्तंभ के रूप में नजर आती हैं जो अपने ससुर से भी टक्कर लेने से नहीं डरतीं।

फैसल रशीद ने दिव्या दत्ता के हस्बैंड का किरदार निभाया है और वे अरुण के बड़े भैया हैं। जिस तरह से फैसल ने बड़े भाई की छवि सीरीज में डाली है वह भी काफी अच्छी लगती है।

संजय मिश्रा जिन्होंने चिरैय्या वेब सीरीज में ससुर का किरदार निभाया है जो कि पेशे से एक लेखक हैं। और स्वभाव से काफी शालीन और अच्छे व्यक्तित्व वाले इंसान हैं। हालांकि जब उनके बेटे की बात आती है तब वह अपनी ही विचारधारा से समझौता कर लेते हैं,

यह जानते हुए कि उनका बेटा ही गलत है फिर भी उसके खिलाफ नहीं जाते। यही वजह है कि संजय मिश्रा सीरीज के क्लाइमेक्स में विलेन जैसा फील देते हैं जो सीरीज को अंत तक देखने के लिए बाँधे रखता है।

छोटी मोटी कमियां भी शामिल हैं:

चिरैया वेब सीरीज में कुछ चीजें हैं जो मुझे लगता है कहानी के हिसाब से अधूरी हैं, जैसे कि अरुण की नौकरी के बारे में कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया गया है, कि वह किस तरह की नौकरी करता है या फिर किस तरह का बिजनेस करता है।

संजय मिश्रा जो सीरीज में ससुर के किरदार में नजर आते हैं, इनका परिवार एक मिडिल क्लास फैमिली जैसा दिखाई देता है लेकिन फिर भी अरुण शादी के अगले ही दिन पूजा को लेकर हनीमून ट्रिप के लिए निकल जाता है, और मुझे लगता है किसी भी मिडिल क्लास फैमिली के लिए इस तरह से हनीमून पर जाना बिल्कुल भी जँचता नहीं।

टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में नानी के किरदार में नजर आने वाली ‘सरिता जोशी’ भी वेब सीरीज चिरैया में दिखाई देती हैं, जिन्होंने यहां संजय मिश्रा की मां वाला किरदार निभाया है जो अधिकतर शांत ही रहती हैं और मुझे लगता है कि उन्हें ज़्यादा डायलॉग जरुर देने चाहिए थे।

निष्कर्ष:

अगर आपको इस वीकेंड कुछ ऐसा देखना है जो समाज में मौजूद एक बड़ी परेशानी है फिर भी उसे सभी नजरअंदाज करते हैं, तब आप ‘चिरैया वेब सीरीज’ को जरूर रिकमेंड कर सकते हैं।

क्योंकि जिस तरह से यह सिर्फ 6 एपिसोड में खत्म हो जाती है वह काफी सेटिस्फाइंग है जो बिल्कुल भी बोरियत फील नहीं कराती हालाँकि इस सीरीज में आपको सस्पेंस या फिर क्राइम या थ्रिलर जैसे एलिमेंट्स बिल्कुल भी देखने को नहीं मिलते हैं, क्योंकि यह एक पारिवारिक कहानी है और मुझे लगता है कि यह हर किसी को एक बार जरूर देखनी चाहिए।

रेटिंग: 3.5/5

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  • arslan khan is a author of oyeisfriday.com

    मैं अर्सलान खान हूँ। बॉलीवुड और OTT कंटेंट के गहन रिव्यू और विश्लेषण का शौक और विशेषज्ञता रखता हूँ। मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है, जिसमें फिल्म स्टडीज और क्रिटिसिज्म भी शामिल था। बीते समय में मुझे अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में काम करने का अनुभव रहा है। और अब मै Oyeisfriday पर बेबाक और गहराई वाले रिव्यूज़ लिखता हूँ,फिर चाहे फिल्म हो या वेब सीरीज।

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