Charak Movie Review: क्या सच में अंधविश्वास के लिए दी गई मासूम की बलि? अंत देखकर सन्न रह जाएंगे!

Charak Movie Review Hindi: 'चरक' मूवी रिव्यू (2026): अंधविश्वास और सस्पेंस का अनोखा संगम। चंदपुर गांव की रहस्यमयी कहानी और लुप्त होते मानवीय मूल्यों पर आधारित एक बेहतरीन सोशल ड्रामा। जानें फिल्म की खूबियां, कमियां और यह किस OTT प्लेटफॉर्म पर आएगी।

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March 12, 2026 11:59 AM (IST)
Charak movie scene: Young woman with marigold petals and garlands in hair, eyes closed in prayer, emotional ritual moment

6 मार्च 2026 के दिन भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म “चरक” (Charak: Fair of Faith)। इसका निर्देशन डायरेक्टर ‘शिलादित्य मौलिक’ ने किया है, जो इससे पहले, स्वेटर (2019), हृदपिंडो (2022), चीने बादाम (2022) और मास्टरमोशाई अपनी किछु देखेन्नी (2023) नाम की फिल्मों को निर्देशित कर चुके हैं।

चरक मूवी की टोटल लंबाई 2 घंटे 2 मिनट (122 मिनट) के बीच है, वहीं इसका जॉनर थ्रिलर, ड्रामा, सोशल ड्रामा कैटेगरी के अंतर्गत आता है।

तो चलिए जानते हैं कैसी है यह फिल्म? और क्या यह आपका कीमती समय डिज़र्व करती है या फिर नहीं?।

चरक फिल्म की कहानी

फिल्म की स्टोरी भारत के एक ऐसे गांव चंदपुर में आधारित है जहां पर चरक नाम के एक त्योहार को काफी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार साल में एक बार ही आता है और गांव के पुराने लोगों की मान्यता के अनुसार इस त्योहार में मांगी गई हर एक मनोकामना पूरी हो जाती है।

हालांकि इसी गांव में रहने वाले दो छोटे बच्चे और बचपन के दोस्त ‘कानू’ और ‘विरसा’ यह नहीं जानते थे कि इस बार का चरक उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदलने वाला है।

फिल्म की कहानी से दो बच्चों की जिंदगी पर फोकस करती है, जिनके नाम कानू (मास्टर शौनक श्यामल) और विरसा (मास्टर शंखदीप बनर्जी) है।

यह दोनों काफी लंगोटिया यार हैं और उनके बीच की दोस्ती इतनी ज्यादा गहरी है, कि कानू का भले ही स्कूल में नाम ना लिखा हो पर वह फिर भी विरसा की मदद से क्लासरूम में छुपकर बैठ जाता है और पढ़ाई करता है।

वहीं विरसा है जिसके परिवार में माता सबित्री (मनोश्री बिस्वास) और पिता बिकाश (सुब्रत दत्त) के अलावा उसके चाचा सुकुमार (शशि भूषण), चाची बिमला (श्रेया भट्टाचार्या) और दादी एक ही घर में रहते हैं।

हालांकि विरसा का पिता शराब की लत में डूबा रहता है जिस वजह से वह अपने बेटे पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाता। वहीं दूसरी ओर विरसा का चाचा सुकुमार और चाची बिमला उसे बहुत प्यार करते हैं, हालांकि उसकी चाची का कोई भी बच्चा नहीं है और इन सबका कसूरवार चाची को माना जाता है।

जिस वजह से उसका चाचा अपनी पत्नी से ठीक से बात भी नहीं करता। वहीं दूसरी तरफ इसी गांव में एक फॉरेस्ट ऑफिसर बागा (पार्थ प्रतिम सरकार) भी दिखाई देता है जिसकी पिछले दिनों इस इलाके में पोस्टिंग हुई है।

लेकिन फिल्म की कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट तब आता है, जब विरसा के चाचा यानी सुकुमार को गांव में मौजूद एक तांत्रिक जगन (नलनीश नील) द्वारा यह बताया जाता है,

कि किसी बच्चे की बलि चढ़ाने से मनोकामना शत प्रतिशत पूरी हो जाएगी और उसकी नजर विरसा पर है। लेकिन इसी बीच कानू का शव मिल जाता है और विरसा लापता हो जाता है।

अब क्या विरसा का मुँह बोला चाचा अपनी साख बजाने के लिए भतीजे को भेंट चढ़ा देगा?

क्या गांव में मौजूद तांत्रिकों की नजर विरसा पर है?

क्या किसी के द्वारा बलि चढ़ाने से पहले विरसा को बचा लिया जाएगा?

इन सभी बड़े सवालों के जवाब जानने के लिए आपको देखनी होगी फिल्म चरक।

फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकीकरण

चरक नाम की इस मूवी का निर्देशन शिलादित्य मौलिक ने किया है। और इस फिल्म को देखने के बाद मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मात्र दो घंटे के भीतर इस तरह की रहस्यमई कहानी को इतने प्रभावी ढंग से स्क्रीन पर पेश करना लाजवाब है।

क्योंकि जिस तरह से चरक फिल्म में गांव के वातावरण को कैमरे पर उतारा गया है, उसे देखकर बिल्कुल भी ऐसा महसूस नहीं होता, जैसे कोई फिल्म देख रहे हों, बल्कि यह फिल्म ऑडियंस को ऐसा फील कराती है जैसे कि हम सच में उस गांव में रह रहे हों।

फिर चाहे वह फिल्म की सिनेमैटोग्राफी हो या फिर BGM हर एक चीज लाजवाब है। जैसे कि वह सीन जब विरसा और उसके स्कूल वाले सभी दोस्त नदी में नहा रहे होते हैं और इस बीच तांत्रिक अघोरियों का एक ग्रुप जाकर नदी से पानी पीने लगता है, उस वक्त जिस तरह से बच्चों के चेहरे पर डर को दिखाया गया है वह बेहतरीन है।

फिल्म की कुछ कमियां

मूवी में बहुत सारी अच्छी चीजों के साथ-साथ इसमें स्टोरी के कई लूपहोल भी दिखाई देते हैं। जैसे कि बिकाश यानी विरसा के पिता वाले किरदार को और भी ज्यादा डेवलप किया जाना चाहिए था, जिससे उनके बैकग्राउंड के बारे में और भी अच्छे से समझ आता।

फिल्म में कई अघोरियों को दिखाया गया है, हालांकि भले ही यह सभी अघोरी काफी डरावने और खतरनाक दिखाई दे रहे हों, लेकिन जब जब इन अघोरियों को कैमरे की फुल स्क्रीन पर दिखाया गया है, तब-तब वे एक नॉर्मल एक्टर जैसे महसूस होने लगते हैं।

फिल्म की अच्छी बातें

फिल्म के शुरुआती सीन में जिस तरह से एक काफी रहस्यमई माहौल क्रिएट करने की कोशिश की गई है, जहां पर बच्चों के गायब होने का अंदेशा मिल जाता है,

यही वजह है कि जैसे-जैसे मैंने फिल्म को देखना शुरू किया, मेरे मन में उत्सुकता बढ़ती चली गई। और मुझे लगता है यही एक बड़ी वजह है जिस वजह से यह फिल्म दर्शकों को अंत तक बांधे रखेगी।

यह स्टोरी एक बहुत ही गंभीर मुद्दे बांझपन पर भी फोकस करती है, जो कि भारत में आज भी काफी सीरियस तरीके से ली जाती है।

आज भी बच्चा पैदा न कर पाने की वजह से बहुत सी महिलाओं को पति और समाज की ओर से उम्र भर प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। फिल्म की स्टोरी में जिस तरह से इस मुद्दे को दिखाया गया है, मैं उसकी सराहना करता हूं।

स्टोरी थ्रिलर, सस्पेंस और मिथकीय अंधविश्वासों की धज्जियां उड़ाती हुई दिखाई देती है, जहां एक तरफ भारत भले ही तेजी से सुपरपावर बनता हुआ नजर आ रहा हो, लेकिन आज भी किसी न किसी पिछड़े इलाके में कोई ना कोई औरत पुराने रीति-रिवाजों की वजह से मुश्किलें झेल रही होगी।

निष्कर्ष: देखें या नहीं?

अगर आप थ्रिलर और सस्पेंस वाली स्टोरी देखना पसंद करते हैं, जिसमें गांव के वातावरण को भी अच्छे से दिखाया गया हो। तब ‘चरक’ फिल्म को रिकमेंड कर सकते हैं। यह फिल्म PEN Studios द्वारा अच्छी हिंदी डबिंग के साथ सिनेमाघरों में रिलीज की गई है।

हालांकि फिलहाल इसे किसी डिजिटल या OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं किया गया है, पर मुझे लगता है कि 30 दिन बाद यह फिल्म किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देखने को मिल सकेगी।

रेटिंग: 3/5

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  • arslan khan is a author of oyeisfriday.com

    मैं अर्सलान खान हूँ। बॉलीवुड और OTT कंटेंट के गहन रिव्यू और विश्लेषण का शौक और विशेषज्ञता रखता हूँ। मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है, जिसमें फिल्म स्टडीज और क्रिटिसिज्म भी शामिल था। बीते समय में मुझे अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में काम करने का अनुभव रहा है। और अब मै Oyeisfriday पर बेबाक और गहराई वाले रिव्यूज़ लिखता हूँ,फिर चाहे फिल्म हो या वेब सीरीज।

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