Behadd Gujarati Movie Review: लव जिहाद या फिर कुछ और? फिल्म का सच जानकर उड़ जाएंगे आपके होश!

क्या 'Behadd' फिल्म 'The Kerala Story' का गुजराती वर्जन है? जानें अंकुश भट्ट के निर्देशन में बनी इस सोशल थ्रिलर की पूरी कहानी, हितु कनोडिया का अभिनय और फिल्म के विवादित पहलुओं का सच। क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए? पढ़ें हमारा निष्पक्ष रिव्यू और रेटिंग।"

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February 23, 2026 8:01 AM (IST)
Behadd Gujarati Movie Review

गुजराती फिल्म इंडस्ट्री की ओर से 20 फरवरी 2026 के दिन सिनेमाघरों में “Behadd” नाम की एक गुजराती फिल्म रिलीज की गई है। इस फिल्म का निर्देशन ‘अंकुश भट्ट’ ने किया है, जो इससे पहले ‘Maaya Ka Moh’ (2024) जैसी फिल्म बना चुके हैं।

इस फिल्म के मुख्य किरदारों में दानेश गांधी, जाह्नवी चौहान, हितु कनोडिया और निमेश दिलीपराय जैसे मझे हुए कलाकार शामिल हैं। इस मूवी का जॉनर सोशल थ्रिलर और ड्रामा है और इसकी लंबाई तकरीबन 2 घंटे 11 मिनट के भीतर है।

तो चलिए जानते हैं कि यह फिल्म आपका समय डिजर्व करती है या नहीं, और करते हैं इस मूवी का रिव्यू।

Behadd फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से गुजरात शहर में सेट है, जो ‘लव जिहाद’ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर फोकस करती है। साथ ही यह समाज को एक सोशल मैसेज देने की कोशिश करती है। फिल्म की कहानी में सेठ बनवारी लाल ज्वेलर की बेटी कृषा को दिखाया गया है, जो काफी मजबूत व्यक्तित्व वाली लड़की है।

लेकिन वह अंदर से काफी उदास है क्योंकि कृषा की मां का देहांत हो चुका है और जल्द ही कृषा का जन्मदिन आने वाला है। यही वजह है कि वह काफी इमोशनल है, हालांकि उसके घर वाले यानी पापा और मामा-मामी उसे अपनी मां की कमी बिलकुल भी महसूस नहीं होने देते।

इसी बीच कृषा की मुलाकात शाश्वत से होती है। शाश्वत उसके लिए केक लेकर आता है, क्योंकि वह जिस एनजीओ (NGO) के लिए सोशल वर्क करता है, वह कृषा का ही है और उसी संस्था के लोगों ने यह केक भेजा है।

आगे चलकर फिल्म में एक ऐसा सीन भी आता है जब कृषा ऊंची बिल्डिंग पर फंसे हुए, एक कबूतर को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर ऊपर चढ़ जाती है। इसी बीच शाश्वत वहां आ जाता है और उस कबूतर को बचाने में कृषा की मदद करता है। इस घटना के बाद धीरे धीरे यह दोनों करीब आने लगते हैं।

फिल्म भले ही सीरियस टॉपिक पर बनी हो, लेकिन बीच बीच में कहानी कॉमेडी का तड़का भी लगाती है। फिल्म में कृषा के मामा का किरदार काफी मजाकिया है, पर वह साथ ही काफी स्मार्ट भी हैं।

वह अपने जीजा के ज्वैलरी स्टोर में काम करते हैं और आए दिन चोरी के जेवरात बेचने आए लोगों को अपनी चतुराई से पकड़वाते रहते हैं।

वहीं दूसरी ओर, टीवी पर एक खबर आए दिन दिखाई जा रही है, जहाँ बताया जा रहा है कि ‘राधिका त्रिवेदी’ नाम की एक लड़की गायब हो गई है।

राधिका के मां-बाप को शक है कि उसे किसी लड़के ने प्यार के जाल में फंसा कर किडनैप कर लिया है। कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब यह पता चलता है कि ठीक उसी तरह के मायाजाल में कृषा को भी फंसाया जा रहा है, क्योंकि शाश्वत नाम का वह लड़का असल में मुसलमान धर्म से ताल्लुक रखता है और उसका असली नाम सलमान है।

अब क्या सलमान अपने नापाक इरादों में कामयाब हो पाएगा?
क्या आगे चलकर शाश्वत के रूप में छिपा यह हैवान कृषा को अपने प्रेम जाल में पूरी तरह फंसा लेगा?
क्या सलमान के तार किसी पाकिस्तानी आतंकी ग्रुप से जुड़े हुए हैं?
या फिर कृषा समय रहते सलमान की असलियत दुनिया के सामने ले आएगी?

इन सभी बड़े सवालों के जवाब जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी।

मूवी के कमजोर पक्ष

बीते सालों में बॉलीवुड में आई फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ ठीक इसी थीम पर आधारित थी, जहाँ एक ऐसे ग्रुप की कहानी दिखाई गई थी जो लड़कियों को धर्म परिवर्तन के जाल में फंसाता है।

ठीक उसी तरह की कहानी ‘Behadd’ फिल्म में भी देखने को मिलती है, जिस कारण फिल्म की स्टोरी में कुछ भी नयापन दिखाई नहीं देता। क्योंकि इस थीम पर पहले भी कई फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं।

आलोचकों का मानना है कि इस तरह की फिल्में काफी सेंसिटिव होती हैं। ‘द केरल स्टोरी’ के समय भी यह विवाद उठा था, कि घटनाओं को काफी बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है। ठीक यही परेशानी ‘Behadd’ फिल्म के साथ भी देखने को मिलती है।

इसे भले ही इस तरह प्रेजेंट किया जा रहा हो कि यह एक सच्ची घटना है, पर इसकी पुष्टि करने के लिए कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है। हालांकि, ‘Behadd’ फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की तरह यह दावा बिल्कुल भी नहीं करती कि यह शत-प्रतिशत सच्ची कहानी है।

मूवी के मजबूत पक्ष

मूवी में लव एंगल को जिस तरह से दिखाया गया है, वह काफी ठीक ठाक है। हालांकि यह शाहरुख खान की पुरानी रोमांटिक फिल्मों जैसा जादुई तो नहीं है, लेकिन फिर भी स्क्रीन पर प्रभावशाली लगता है।

‘Behadd’ फिल्म को मुख्य रूप से गुजराती भाषा में रिलीज किया गया है, जिस वजह से गुजरात के लोग इसकी मिट्टी से काफी हद तक कनेक्ट कर पाएंगे।

मूवी का बैकग्राउंड म्यूजिक भी काफी सिंपल और सोबर है, जो इमोशन और तनावपूर्ण दृश्यों में अच्छा काम करता है। फिल्म में मामा का कॉमेडी किरदार कहानी के गंभीर माहौल और मनोरंजन के बीच सटीक संतुलन बनाए रखता है।

निष्कर्ष: देखें या छोड़ें?

सिनेमाई दृष्टि से देखा जाए तो ऐसी फिल्मों का अपना एक खास दर्शक वर्ग होता है। एक फिल्म क्रिटिक के तौर पर मुझे लगता है कि ‘Behadd’ की कहानी औसत है।

इसे पूरी तरह ‘रियल इंसिडेंट’ समझना शायद सही न हो, क्योंकि यह एक फिल्म है जिसे मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है और हमें इसे एक सिनेमाई कृति की तरह ही देखना चाहिए।

फिल्म का बजट सीमित लगता है, जो कि रीजनल (क्षेत्रीय) फिल्मों में एक आम बात है। अगर आप ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्में पसंद करते हैं और उसी पैटर्न की थ्रिलर देखना चाहते हैं, तो आप इस गुजराती फिल्म को देख सकते हैं।

रेटिंग : 2.5/5

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  • arslan khan is a author of oyeisfriday.com

    मैं अर्सलान खान हूँ। बॉलीवुड और OTT कंटेंट के गहन रिव्यू और विश्लेषण का शौक और विशेषज्ञता रखता हूँ। मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है, जिसमें फिल्म स्टडीज और क्रिटिसिज्म भी शामिल था। बीते समय में मुझे अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में काम करने का अनुभव रहा है। और अब मै Oyeisfriday पर बेबाक और गहराई वाले रिव्यूज़ लिखता हूँ,फिर चाहे फिल्म हो या वेब सीरीज।

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