मलयालम सिनेमा दृश्यम,मोरीज, मुंबई पुलिस जैसी थ्रिलर फिल्मों के लिए जाना जाता है। ऐसे ही निविन पॉली की एक फिल्म “बेबी गर्ल” को 23 जनवरी 2026 से सिनेमाघरों में रिलीज किया गया था। हमने अपने आर्टिकल के माध्यम से पहले ही इस बात की जानकारी दी थी, कि फिल्म बेबी गर्ल को हिंदी डबिंग के साथ सोनी लिव पर रिलीज किया जाएगा।
और अब फाइनली सोनी लिव पर आप इसे देख सकते हैं। जिसका डायरेक्शन किया है अरुण वर्मा ने। इनकी फिल्म ‘गरुड़न’ क्राइम एक्शन थ्रिलर फिल्म को हिंदी दर्शकों ने खूब पसंद किया था। बेबी गर्ल की अगर आईएमडीबी रेटिंग देखें तो यह 7.6 की है। निविन पॉली की पिछली फिल्म सर्वम माया सिनेमाघर में हिट रही थी, पर बेबी गर्ल ने कुछ खास कमाल नहीं दिखाया। आइए जानते हैं कैसी है यह फिल्म, करते हैं फिल्म की समीक्षा।
क्या है बेबी गर्ल की बेसिक कहानी
उत्सुकता बढ़ाने वाली यह कहानी शुरू होती है क्रिसमस की शाम से, जहां एक अस्पताल में सब कुछ सामान्य अवस्था में चल रहा है। अस्पताल में मौजूद नर्स, डॉक्टर और अटेंडेंट सभी अपने काम में बिजी हैं। तभी एक अलार्म के जरिए पता चलता है कि अस्पताल से एक नवजात बच्ची गायब हो चुकी है।
इस खबर के आते ही अस्पताल में हलचल मच जाती है और पुलिस को बुलाया जाता है। अब सबको अस्पताल में काम करने वाले अटेंडेंट सनल मैथ्यू पर शक है। सनल अटेंडेंट के रूप में यहां काम करता है और वह यह बताता है कि एक बुर्के में आई महिला उसेl बच्ची को लेकर गई है। पर कहानी का ट्विस्ट कुछ अलग ही है।
जब लोगों के साथ पुलिस भी सनल पर शक करने लगती है तब उसे चैन नहीं पड़ता। उस बच्ची की तलाश में खुद को निर्दोष साबित करने के लिए सनल निकल पड़ता है, खुद को निर्दोष साबित करने मे। अब क्या सनल अपने आप को निर्दोष साबित कर पाता है? कहीं ऐसा तो नहीं कि इस बच्ची के अपहरण के पीछे सनल का ही हाथ हो।
इन सब जवाब डिटेल में जानने के लिए आपको जाना होगा ‘सोनी लिव’ के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर, जहां पर यह फिल्म हिंदी डबिंग के साथ उपलब्ध है। फिल्म को देखते समय आपको बार-बार यह महसूस होगा कि अगर यह सब मेरे साथ होता तो मैं क्या करता। जिन दर्शकों को थ्रिलर फिल्में देखना पसंद है, यह फिल्म भी बिल्कुल वैसी ही है जो डराती नहीं बल्कि सोचने पर मजबूर कर देती है।
क्या हमें यह फिल्म देखना चाहिए या नहीं?
अगर आपने कोलिवुड मूवी ‘डीएनए’ पहले देख रखी है, तब आपको बेबी गर्ल की कहानी कुछ हद तक उस फिल्म से मिलती-जुलती सी लगेगी। जिस तरह डीएनए में दिखाया था, कि एक नवजात शिशु किडनैप हो गया था वैसा ही कुछ बेबी गर्ल में भी देखने को मिलेगा। पर दोनों फिल्मों के किडनैपिंग के पीछे की मिस्ट्री एक जैसी नहीं है।
फिल्म बेबी गर्ल ने सिनेमाघरों में कुछ खास कमाल नहीं किया, इस वजह से मेरी इस फिल्म को देखने का उत्साह उतना नहीं था जितना कि अन्य मलयालम मिस्ट्री थ्रिलर देखने का होता है। तो उसके हिसाब से मुझे यह एक डीसेंट फिल्म लगी। अगर मैं पहले ही इससे कुछ ज्यादा अपेक्षा कर लेता तो शायद मुझे निराशा हाथ लगती।
बच्चों के किडनैपिंग के इर्द-गिर्द घूमती इस फिल्म की कहानी सेकंड हाफ के बाद खुद बयां कर देती है, कि वह बच्चा आखिर गया तो गया कहां। फिल्म बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ती है,शायद यही एक वजह है कि कैरेक्टर डेवलपमेंट में थोड़ी कमी रही। क्योंकि क्लाइमेक्स में दिखने वाला इमोशंस दर्शकों को उस तरह से ट्रिगर नहीं कर सका जैसा कि करना चाहिए था।
बहुत कम उम्मीद के साथ आप इस फिल्म को एक बार देख सकते हैं अपने पूरी फैमिली के साथ बैठकर। मेरी तरफ से इसे दिए जाते हैं पांच में से ढाई स्टार की रेटिंग। टेक्निकल पॉइंट की बात की जाए तो फिल्म की म्यूजिक, बीजीएम और सिनेमैटोग्राफी शानदार है, जिसकी एक बड़ी वजह यह है कि इसका प्रोडक्शन बजट काफी ज्यादा था। कहानी ने शुरू से लेकर अंत तक कहीं पर भी बोरियत महसूस नहीं होने दी।
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