Assi Movie Review: क्या पिंक आर्टिकल 15 जैसी फिल्मों का टूटेगा रिकॉर्ड अनुभव सिन्हा का एक और मास्टरपीस अस्सी

Assi Movie Review: अनुभव सिन्हा की झकझोर देने वाला कोर्टरूम ड्रामा है, जो भारत में बढ़ते अपराधों पर कड़ा प्रहार करता है। तापसी पन्नू और जीशान अय्यूब के दमदार अभिनय से सजी यह फिल्म न्याय की गूंज है।

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February 20, 2026 11:13 AM (IST)
Assi Movie Review Hindi

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मे डायरेक्टर ‘अनुभव सिन्हा’ की पहली फिल्म ‘तुम बिन’ थी। इसके बाद अनुभव ने लीक से हटकर ‘मुल्क’ ‘थप्पड़’ और ‘गुलाब गैंग’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया। अगर आपको उनकी बड़ी फिल्मों के बारे में जानना है तो शाहरुख खान के साथ ‘रावन’ का निर्देशन भी इन्होंने ही किया था।

इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अनुभव सिन्हा को छोटे बजट से लेकर बड़े बजट की फिल्में बनाने का पूरा अनुभव है। चाहे सुपरस्टार हों या छोटे कलाकार, उन्हें हर तरह के अभिनेताओं के साथ काम करने का एक्सपीरियंस है।

अब भीड़ से हटकर फिल्में बनाने वाले अनुभव सिन्हा की, इस फ्राइडे यानी 20 फरवरी 2026 को “अस्सी” (ASSI) नाम की एक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म को टी-सीरीज और बनारस मीडियावर्क्स के द्वारा प्रोड्यूस किया गया है।

2 घंटे 13 मिनट की यह फिल्म एक कोर्टरूम थ्रिलर सोशल ड्रामा है जिसमें जीशान अय्यूब, मनोज पाहवा, तापसी पन्नू और कुमुद मिश्रा के साथ कैमियो में ‘नसीरुद्दीन शाह’ भी दिखाई दे रहे हैं।

रेटिंग की बात की जाए तो ‘इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा इसे 5 में से 3.5 की रेटिंग मिली है, ‘एनडीटीवी’ ने इसे 2.5 दिए हैं, वहीं ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने 3 स्टार की रेटिंग दी है। ‘फिल्मफेयर’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने 5 में से 4 स्टार की रेटिंग दी है। आइए जानते हैं अपने इस आर्टिकल के माध्यम से कि क्या खास है इस फिल्म में।

एक औरत के न्याय और अन्याय की कहानी

सबसे पहले तो यह जान लें, कि भारत में हर 20 मिनट के अंदर एक रेप होता है। फिल्म के अंदर भी हर 20 मिनट के बाद आपको रेड स्क्रीन दिखाई देगी जिस पर एक मैसेज आता है “Another woman has been raped in India”।

यह दर्शकों को याद दिलाता है कि १५-२० मिनट हो चुके हैं और इन 20 मिनट के अंदर देश में एक और रेप हुआ ।NCRB (National Crime Records Bureau) के हालिया आंकड़ों के अनुसार यह औसत लगभग हर 15 से 18 मिनट का है।

यह सिर्फ एक कहानी नहीं है बल्कि वह सच है जो अब आम हो गया है, इतना आम कि लोग अब इस मुद्दे पर बात ही नहीं करते। अनुभव सिन्हा ने इस मुद्दे को उठाया है और आज की युवा पीढ़ी को बेबाकी के साथ अपनी फिल्म के माध्यम से हकीकत बताने की कोशिश की है।

कहानी की शुरुआत दिल्ली से होती है। ‘परिमा’ (कनी कुसृति) नाम की एक टीचर है जो अपने पति विनय के साथ रहती है। परिमा केरल से ताल्लुक रखती है और इन दोनों का एक छोटा बेटा भी है। उनकी जिंदगी में सब कुछ तब बदल जाता है, जब एक रात परिमा अपनी स्कूल की एक पार्टी से वापस लौट रही होती है।

तभी एक बड़ी गाड़ी में बैठे पांच लड़के उसे किडनैप कर लेते हैं, और उसका गैंगरेप करते हैं। इतना ही नहीं हैवानियत की हदें पार करते हुए ये पांचों अमीर जादे लड़के इस मासूम को रेलवे पटरी पर मरने के लिए फेंक देते हैं।

पर वह किसी तरह बच जाती है और अस्पताल में एडमिट होती है। अब उसका पूरा परिवार टूट गया है। समाज इस परिवार को अलग नजरिए से देखने लगता है। लोग तरह-तरह की बातें बना रहे हैं कि आखिर रात में अकेले जाने की जरूरत क्या थी, पार्टी में जाना जरूरी था क्या?

वे पांचों लड़के अमीर घरानों से ताल्लुक रखते हैं जिनके पास पैसा भी है और पावर भी। अब इस केस को ‘रावी’ (तापसी पन्नू) संभालती हैं। क्या परिमा को तापसी पन्नू न्याय दिलाने में कामयाब रहती हैं या नहीं, यही फिल्म ‘अस्सी’ में आगे देखने को मिलता है। न्याय और अन्याय की इस जंग में क्या पैसा और पावर जीतेगा इसे जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी।

दमदार अभिनय और सधी हुई कास्टिंग

फिल्म के अंदर जीशान अय्यूब और तापसी पन्नू का शानदार प्रदर्शन देखने को मिलता है। रेप विक्टिम परिमा यानी कनी कुसृति के काम की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। उन्होंने एक पीड़िता के दर्द को इस तरह दिखाया है, जिसे देखकर दर्शकों को भी वह दर्द महसूस होता है।

कुल मिलाकर इसकी कास्टिंग पर अनुभव ने बहुत ध्यान दिया है। फिल्म की रिदम, पेसिंग और टोन बिल्कुल बैलेंस मे है, जो यह दर्शाता है कि अनुभव सिन्हा के निर्देशन में किसी भी तरह की कमी नहीं है।

अनुभव हमेशा से अलग तरह की फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। ‘पिंक’, ‘आर्टिकल 15’ और ‘मुल्क’ जैसी फिल्मों की तरह ‘अस्सी’ भी एक कोर्टरूम ड्रामा है जो सीधे दर्शकों के दिल को छूने का काम करती है।

नसीरुद्दीन शाह का किरदार तापसी पन्नू के मार्गदर्शक के रूप में दिखाया गया है जो बहुत छोटा पर असरदार है। अनुभव ने चिल्ला-चिल्लाकर यह बताया है कि इस मुद्दे को ‘पर्सनल’ लेना होगा जब तक हम इसे व्यक्तिगत तौर पर महसूस नहीं करेंगे,तब तक समाज में यह सब ऐसे ही चलता रहेगा।

मैं इसे दूंगा 5 में से 4 स्टार की रेटिंग।

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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