Agra Movie Review: क्या ‘आगरा’ फिल्म सिर्फ एडल्ट कंटेंट है या कोई गहरी मिस्ट्री? देखने से पहले ये रिव्यू जरूर पढ़ें!

Arslan Khan
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14 नवंबर 2025 के दिन भारतीय सिनेमाघरों में एक फिल्म रिलीज हुई थी, जिसका नाम “आगरा” है। हालांकि आगरा नाम की इस मूवी की पास्ट हिस्ट्री काफी डार्क रही है, क्योंकि भारत में इसके रिलीज़ से पहले सेंसर बोर्ड ने इस पर कैंची चलायी थी, लेकिन बाद में इसके कई सीन्स को काट-छांट कर रिलीज किया गया था।

इस फिल्म का निर्देशन ‘कानू बहल’ ने किया है, जो कि इससे पहले ‘तितली’ नाम की मूवी को भी डायरेक्ट कर चुके हैं’ जिसे 2014 के कान्स फेस्टिवल में दिखाया गया था।

आगरा फिल्म के मुख्य कलाकारों की बात करें तो इसमें, मोहित अग्रवाल, प्रियंका बोस, राहुल रॉय, विभा छिब्बर, सोनल झा, आंचल गोस्वामी, और रुहानी शर्मा सहित अन्य कलाकार नजर आते हैं।

इस मूवी की लंबाई तकरीबन 132 मिनट (2 घंटे 12 मिनट) के भीतर है तो वहीं इसका जॉनर एरोटिक साइकोलॉजिकल ड्रामा कैटेगरी के अंतर्गत आता है।

तो चलिए जानते हैं आगरा फिल्म की मिस्ट्री, और साथ ही यह भी कि 2023 के कान्स फेस्टिवल में रिलीज होने के बावजूद भी यह सिनेमाघरों में दर्शक क्यों नहीं जुटा पाई? और करते हैं इस फिल्म का डिटेल रिव्यू।

आगरा फिल्म की कहानी

फिल्म की पटकथा यानी कहानी मुख्य रूप से गुरु नाम के किरदार पर आधारित है, जिसकी उम्र 24 साल की है, साथ ही वह कॉल सेंटर में नौकरी भी करता है। गुरु के परिवार में उसके पापा यानी ‘डैडी जी’ (राहुल रॉय) और साथ ही साथ उनकी दो बीवियां मौजूद हैं।

Three Indian women in sarees and kurtis having serious conversation in home living room, one holding teacup, emotional family moment

 

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जिसका मतलब यह है कि गुरु के पिता ने दो शादियां की हैं और सबसे मजे की बात तो यह है, कि यह दोनों ही बीवियां एक ही घर में रहती हैं। हालांकि गुरु की असली मां ‘मम्मी जी’ (विभा छिब्बर) ग्राउंड फ्लोर पर रहती है, तो वहीं इसकी सौतेली मां ‘आंटी जी’ (सोनल झा) और उसका पिता सेकंड फ्लोर पर।

साथ ही गुरु की एक चचेरी बहन ‘छवि’ (आंचल गोस्वामी) भी है, जो कि उम्र में उससे बड़ी है, साथ ही डेंटल डॉक्टरी की डिग्री हासिल कर चुकी है। हालांकि इस परिवार में बहुत सारी अलग अलग परेशानियां चल रही हैं।

क्योंकि गुरु की मां हमेशा ही अपनी सौतन को लेकर गुस्से में रहती है, साथ ही उसे अपने पति से एक शिकायत भी है, कि उसका पति अपना पूरा ध्यान और सारा पैसा अपनी दूसरी बीवी पर ही खर्च कर रहा है।

Two older Indian men standing in a narrow alley with serious expressions, one with white hair in checkered shirt, other bearded in grey striped polo

 

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वहीं दूसरी तरफ गुरु है, जो एक काफी गंभीर बीमारी (सेक्शुअल रेप्रेशन) से जूझ रहा है। जिसकी वजह से उसके साथ फ्रस्ट्रेशन और हैलुसिनेशन का सिलसिला लगातार चलता रहता है। हालांकि यह बीमारी इतनी सिंपल नहीं है जितनी यह सुनने में लग रही है।

क्योंकि इस बीमारी की वजह से गुरु कई बार बड़ी मुसीबत में भी पड़ जाता है, क्योंकि उसे किसी भी फीमेल को देखकर यौन उत्तेजना होने लगती है, जिस वजह से वह कई बार खुद को नुकसान भी पहुंचाता है।

जैसे कि फिल्म का वह सीन जब गुरु फिनायल की बोतल पी लेता है, हालांकि इस दौरान इस परिवार के फैमिली डॉक्टर घर में आकर इस माजरे को सुलझा लेते हैं और यह फिनायल वाली बात घर में ही दब कर रह जाती है।

हां लेकिन इस दौरान उस डॉक्टर को एक भारी कीमत जरूर चुकानी पड़ती है। फिल्म में कई ऐसे डिस्टर्बिंग मोमेंट्स दिखाए गए हैं, जिन्हें सभ्य समाज का नागरिक होने के नाते मैं खुल कर कह नहीं सकता।

आगरा फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, यानी सेकंड हाफ में, तब थोड़ा इंटरेस्टिंग बन जाती है। जब गुरु की मुलाकात प्रीति (प्रियंका बोस) से होती है। प्रीति जो कि एक इंडिपेंडेंट वूमेन के तौर पर साइबर कैफे चलाती है।

Indian man sipping sugarcane juice in street shop while woman in saree stands with serious expression, emotional moment in dhaba-like setting

 

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जिसकी पहले ही दो शादियां हो चुकी हैं, जहां प्रीति की पहली शादी फिजिकल हरासमेंट की वजह से टूट गई तो वहीं उसकी दूसरी शादी के बाद पति हार्ट अटैक से जान गंवा बैठा।

हालांकि प्रीति का दूसरा पति उसके लिए जायदाद के तौर पर सिर्फ एक साइबर कैफे ही पीछे छोड़कर गया है। लेकिन प्रीति की मुश्किलें अभी बनी हुई हैं क्योंकि उसके दूसरे पति का बेटा इस साइबर कैफे को हड़पने की कोशिश आए दिन करता रहता है। जैसे कि वह सीन जब दो बाइक सवार प्रीति के साइबर कैफे में आग लगा देते हैं।

लेकिन जैसे-जैसे गुरु और प्रीति की मुलाकातें बढ़ने लगती हैं प्रीति को समझ आ जाता है, कि गुरु को उससे प्यार हो गया है। क्योंकि गुरु एक सीन में जब प्रीति को एक नया और महंगा इंटरनेट राउटर खरीद कर ला कर देता है, प्रीति तुरंत ही समझ जाती है कि गुरु का इरादा उससे शादी करने का है।

लेकिन अब आगरा फिल्म की कहानी में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट देखने को मिलता है, क्योंकि एक तरफ गुरु को प्रीति से शादी करनी है, हालांकि शादी करने के लिए उसके पास एक कमरा होना जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ गुरु का फादर है, जो अपनी तीसरी शादी करने के फ़िराक़ में है।

Indian woman and bearded man in serious discussion at restaurant table, woman with plate of food looking thoughtful, man holding napkin

 

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फिल्म में एक और इंटरेस्टिंग किरदार देखने को मिलता है, जो कि गुरु की चचेरी बहन यानी छवि का मंगेतर है, साथ ही वह छवि के सामने यह शर्त रखे हुए है कि वो एक ही कीमत पर उससे शादी करेगा, अगर उसे गुरु के घर में एक कमरा मिल जाए जिसमें वह क्लीनिक खोल सके।

इस फिल्म के आगे की कहानी इन्हीं सवालों पर टिकी हुई है-
क्या गुरु की शादी प्रीति से हो पाएगी?
गुरु का फादर तीसरी शादी करके घर के पुराने सदस्यों को बाहर निकाल देगा?
क्या गुरु अपना नया कमरा बनवा पाएगा?

इन्हीं सभी बड़े सवालों के जवाब जानने के लिए आपको देखनी होगी फिल्म आगरा।

कैसा है फिल्म का निर्देशन

इसके डायरेक्टर कानू बहल हैं, जिन्होंने आगरा फिल्म का डायरेक्शन किया है और मुझे लगता है यह ठीक उसी तरह का है, जैसे उन्होंने ‘तितली’ फिल्म में किया था। जहां कल्पना और असली दुनिया का फर्क समझने में थोड़ी परेशानी महसूस होती है।

क्योंकि फिल्म की कहानी में मैं कई बार कंफ्यूज हो रहा था,असल में यहां ऐसे बहुत सारे दृश्य मौजूद थे जो फिल्म के मुख्य किरदार गुरु की फैंटेसी के रूप में अचानक स्थापित कर दिए जाते हैं।

फिल्म की बड़ी कमियां

आगरा फिल्म रिलीज होने से पहले ही काफी सालों तक कंट्रोवर्सी में फंसी रही, हालांकि बाद में कोरोना की वजह से इसे और भी ज्यादा टालना पड़ा था।

लेकिन अभी रिसेंटली जब मैंने इस फिल्म को देखा, तब मुझे इस बात का एहसास हुआ, कि इस मूवी के भारत में इसके रिलीज़ से पहले सेंसर बोर्ड ने इस पर कैंची क्यों चलायी थी, लेकिन बाद में इसके कई सीन्स को काट-छांट कर रिलीज किया गया था।

मुझे लगता है यह भारतीय सेंसर बोर्ड का बिल्कुल सही फैसला था। क्योंकि इस फिल्म में बहुत सारे ऐसे दृश्य दिखाए गए हैं, जो काफी अतरंगे हैं। जिन्हें सिनेमाघरों में नॉर्मल जनता के लिए रिलीज करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था।

इस फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी कमी जो मुझे महसूस हुई, वह है इसके मुख्य किरदार गुरु को होने वाले हैलुसिनेशन। क्योंकि इस फिल्म को देखने के बाद मैंने गुरु की बीमारी के बारे में इंटरनेट पर काफी जानकारी इकट्ठा की जहां मुझे पता चला, कि हां इस तरह का मानसिक रोग असल में एक्जिस्ट करता है।

लेकिन एक बड़ी शिकायत जो मुझे इस फिल्म के डायरेक्टर से है, क्योंकि उन्होंने जिस तरह से इसकी कहानी में सेक्सुअल एलिमेंट्स को एग्जीक्यूट किया है वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

फिल्म में एक किरदार है पापा जी, जो पहले ही दो शादियां कर चुके हैं और तकरीबन 60 साल से ज्यादा की उम्र के हैं। और यह पापा जी जल्द ही तीसरी शादी करना चाह रहे हैं। लेकिन फिल्म के मेकर्स ने इस बात का खुलासा बिल्कुल भी नहीं किया।

जिसमें उन्होंने यह बताया हो कि पापा जी का बिजनेस क्या है? और उनके पास इतना पैसा कहां से आता है? किस तरह से वह अपना जीवन यापन करते हैं? जो मुझे इस फिल्म के डायरेक्शन की एक बड़ी चूक लगी। क्योंकि मुझे लगता है कानू बहल ने यौन वाले सीन्स पर ही सारा फोकस रखा जिस वजह से वह बाकी के किरदारों को कहानी में सेट करना भूल ही गए।

फिल्म की तीसरी बड़ी कमी जो मुझे महसूस हुई वह है, स्टोरी में दिखाई गई गुरु की वह काल्पनिक गर्लफ्रेंड जिससे वह बातें करता रहता है। क्योंकि उसे जिस तरह से दिखाया गया है, उसे देखकर मुझे नहीं लगता कि वह सिर्फ कोई काल्पनिक लड़की थी।

बल्कि मेरे हिसाब से वह गुरु की पास्ट लाइफ से कहीं ना कहीं जुड़ी हुई होगी, या फिर कहीं ना कहीं वह उस लड़की से मिला होगा, यही वजह हो सकती है की गुरु उसे अपनी फैंटेसी के तौर पर महसूस करता था।

मूवी में कई बार कुछ किरदार काफी अजीब लगते हैं, जैसे कि वह डॉक्टर जो गुरु के फिनाइल पीने के बाद उसे ठीक करने के लिए आता है। यह डॉक्टर काफी अजीब है साथ ही यह सीन भी उतना ही अजीब है।

क्योंकि इस दृश्य में डायरेक्टर ने दर्शकों के दिमाग से खेलने की कोशिश की है। क्योंकि जब वह गुरु को इंजेक्शन लगा रहा था तो ऐसा लगता है कि वह टीका कोई मामूली नहीं बल्कि नसबंदी वाला टीका है।

फिल्म की अच्छी चीज

वैसे तो इस फिल्म में बहुत सारी बड़ी-बड़ी गड़बड़ियां दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ ऐसी चीजें भी शामिल हैं जो ठीक-ठाक हैं। जैसे कि आगरा फिल्म में दिखाया गया गुरु के परिवार का वातावरण जो कि एक असली गरीब तबके के परिवार से हू-ब-हू मिलता जुलता है।

Two Indian men in serious discussion indoors: bearded young man in blue striped polo shirt, older man in maroon shirt looking thoughtful

 

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फिल्म के क्लाइमेक्स में घर बनवाने के लिए एक बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन डील वाला दृश्य देखने को मिलता है, जो इस फिल्म के जॉनर से हटकर कहानी को थोड़ा सा थ्रिलिंग बनाता है।

फिल्म की लंबाई को 2 घंटे 12 मिनट का रखा गया है, हालांकि भले ही फिल्म में सब कुछ ऊटपटांग चल रहा हो लेकिन फिर भी यह दो घंटे 12 मिनट आपको उतने ज्यादा नहीं लगते, क्योंकि स्टोरी के हर एक सीन में कुछ ना कुछ अलग और अतरंगी चलता रहता है।

निष्कर्ष

अगर आप कंट्रोवर्शियल फिल्में देखना पसंद करते हैं, जो किसी साइकोलॉजिकल बीमारी या फिर सेक्सुअल कंटेंट की वजह से लंबे समय तक चर्चा में बनी रही हो। तब आगरा फिल्म को आप एक बार रिकमेंड कर सकते हैं।

हालांकि यह मूवी उस तरह की बिल्कुल भी नहीं है जो दर्शकों को किसी भी तरह की सीख देकर जाए। साथ ही फिल्म में बहुत सारे भद्दे भद्दे एडल्ट सीन डाले गए हैं जिस वजह से इसे फैमिली के साथ तो बिल्कुल भी ना देखें।

रेटिंग: 2.5/5

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