The Kerala Story 2 Review: द केरला स्टोरी 2: प्रोपेगेंडा या सच जाने हमारे रिव्यू में

The Kerala Story 2 Review: द केरला स्टोरी 2' की समीक्षा: क्या यह फिल्म वास्तविकता है या महज बॉक्स ऑफिस के लिए बनाया गया प्रोपेगेंडा कहानी के लूपहोल्स, विवाद और हमारे निष्पक्ष रिव्यू को विस्तार से पढ़ें।

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February 28, 2026 4:33 PM (IST)
The Kerala Story 2 Goes Beyond promotional image: Indian woman in red lehenga and man in yellow kurta sharing emotional moment

2023 में आई ‘द केरला स्टोरी‘ का दूसरा भाग ‘द केरला स्टोरी 2‘ को अब सिनेमाघरों में रिलीज कर दिया गया है। इसका निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह ने किया है और इसे प्रोड्यूस करने वालों में विपुल अमृतलाल शाह शामिल हैं।

इसमें मुख्य भूमिका में उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा, अदिति भाटिया, सुमित गुलटी और अर्जुन सिंह दिखाई दे रहे हैं। फिल्म के जॉनर की बात करें तो इसे सोशल कंट्रोवर्शियल ड्रामा बोला जा सकता है। हाल ही में यह भारी विवादों के घेरे में भी रही।

जहां कुछ लोगों का मानना है कि यह फिल्म सच्चाई बयां कर रही है, वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि यह पूरी तरह से प्रोपेगेंडा और कम्युनल हार्मनी को ठेस पहुंचाने वाली फिल्म है। आमतौर पर इसका बजट नहीं बताया गया, पर इस तरह की फिल्मों का बजट 28 से 30 करोड़ के बीच होता है।

सैकनिल्क वेबसाइट के डेटा के अनुसार फिल्म ने अपने पहले दिन पर 3.50 करोड़ का कलेक्शन किया है। वहीं ‘द केरला स्टोरी 1’ फिल्म की बात की जाए तो उसने अपने पहले दिन पर, लगभग 8 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया था।

क्या है फिल्म का बेसिक प्लॉट?

‘द केरला स्टोरी 2’ पहली फिल्म से आगे जाती है। अब यह केवल केरल तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि यहां पर तीन अलग-अलग राज्यों की लड़कियों को दिखाया गया है। ये तीनों लड़कियां मुस्लिम लड़कों के जाल में फंस जाती हैं।

पहले तो इनको सब कुछ सामान्य लगता है, पर बाद में पता चलता है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत धर्म परिवर्तन की राह पर इन्हें चलाया जा रहा है। जिस प्यार को इन लड़कीयों ने अपनी आजादी के लिए चुना था, अब वही प्यार उनकी आजादी छीनने वाला है।

इन तीनों लड़कियों के किरदार में उल्का गुप्ता, अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा दिखाई दे रही हैं जिन्होंने फिल्म के अंदर बहुत अच्छा काम किया है।

जहां ‘द केरला स्टोरी 1’ में सिर्फ केरल में हो रहे धर्म परिवर्तन को लेकर कुछ मुद्दे उठाए गए थे, वहीं इस फिल्म में देश के अलग-अलग राज्यों के मुद्दों पर रोशनी डाली गई है।

अब फिल्म को लेकर लोग दो हिस्सों में बंट चुके हैं, जहाँ एक हिस्से को लगता है यह पूरा प्रोपेगेंडा हैवहीं दूसरा हिस्सा मानता है कि यहां सच को दिखाने की कोशिश की गई है।

‘द केरला स्टोरी 2’ को लेकर मेरी राय

जहां मुझे ‘द केरला स्टोरी 1’ ने बहुत प्रभावित किया था, वहीं अब ‘द केरला स्टोरी 2’ ने निराशा से भर दिया है। यहां तीन लड़कियों की कहानी दिखाई गई है, जो केरल, मध्य प्रदेश और राजस्थान की रहने वाली हैं। इस फिल्म में मेकर्स के द्वारा लव जिहाद के मुद्दे को दिखाया गया है।

द केरला स्टोरी 2 की सबसे बड़ी खामी यह है कि, इसका नाम ‘केरला स्टोरी’ क्यों रखा गया जब कहानी तीन अलग-अलग राज्यों की थी? इससे यह साफ जाहिर होता है कि मेकर्स का पूरा ध्यान ‘द केरला स्टोरी 1’ की सफलता को भुनाना था।

लूपहोल्स से भरी हुई इलॉजिकल कहानी

फिल्म के स्क्रीनप्ले का एग्जीक्यूशन बहुत ही घटिया तरीके से किया गया है। फिल्म मेकिंग के नजरिए से देखा जाए तो, यहां बहुत से लूपहोल्स देखने को मिल सकते हैं।

फिल्म में मौजूद जोधपुर वाले केस में पॉक्सो (POCSO) एक्ट को डाला गया है क्योंकि वहां लड़की की उम्र 16 साल दिखाई गई थी। कहानी इतनी इलॉजिकल है जिसे देखकर हंसी आती है। आज के समय में भला ऐसी कौन सी लड़की होगी जो इस तरह के ट्रैप में इतनी आसानी से फंस जाएगी

लड़कियों के पास फोन भी है पर वे अपने घर वालों को फोन तक नहीं कर रही हैं।फिल्म देखते समय एक आम दर्शक को भी आसानी से समझ आ जाएगा कि इसे एक प्रोपेगेंडा के तौर पर बनाया गया है, खासकर फिल्म के अंत वाले सीन को देखकर। इस फिल्म ने दर्शकों को बेवकूफ बनाने के सिवा और कोई काम नहीं किया।

बिखरी हुई कहानी: केरला स्टोरी 2

अक्सर देखा गया है कि जब भी किसी फिल्म का सीक्वल आता है और वह फॉर्मूला सफल रहता है, तो शायद यही सोचकर मेकर्स ने ‘केरला स्टोरी 2’ को बनाया।

यह फिल्म पूरी तरह से फोर्सफुल तब बन जाती है जब यह एक समाज के प्रति जहरीली बातें करती है। इस पूरी फिल्म की कहानी मुझे ऐसा लगता है कि व्हाट्सएप फॉरवर्ड और गूगल पर बैठकर तैयार की गई है।

फिल्म की केरल स्टेट वाली कहानी में जो लड़की होती है वह एक शादीशुदा मुस्लिम लड़के से प्यार करने लगती है और अपने घर वालों को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए आसानी से मना लेती है।

बाद में जब उसे पता चलता है, कि वह एक ट्रैप में फंसी है वह मार खा रही है पर मजाल है कि कुछ कह दे। अगर आपको इस तरह की फिल्म देखना पसंद है, तो द केरला स्टोरी 2 फिल्म को देख सकते हैं। वो भी बिना दिमाग लगाए क्योंकि फिल्म के मेकर्स ने यहां बिल्कुल दिमाग नहीं लगाया तो भला आप क्यों लगाएंगे।

फिल्म के द्वारा दिया गया संदेश

फिल्म के मेकर्स द्वारा जो संदेश दिए गए हैं उनका कोई मतलब नहीं निकलता क्योंकि यह फिल्म सिर्फ पैसे कमाने के लिए बनाई गई है न कि किसी का भला करने के लिए। मेकर्स को न महिलाओं की न समाज की और न ही धर्म परिवर्तन की चिंता है; उन्हें बस चिंता है अपनी जेब भरने की।

समाज के भले के लिए नहीं बनी द केरला स्टोरी 2

ऐसा नहीं है कि इस तरह की घटनाएं देश में कहीं होती नहीं होंगी, होती हैं। पर जिस तरह से यहां एक अलग नजरिए से पूरी की पूरी कम्युनिटी को गलत दिखाया गया है, वह बिलकुल भी सही नहीं।

यह फिल्म न समाज के भले के लिए है और न ही किसी महिला के भले के लिए इसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना है। हो सकता है कि यह फिल्म भी खूब पैसा कमाए और आने वाले समय में इसका पार्ट 3 भी देखने को मिले।

द केरला स्टोरी 2 फिल्म को अगर फिक्शन (कल्पना) बताया जाता तो सब ठीक था पर जब बात आती है सच्ची घटना पर आधारित होने की तो वहां यह पूरी तरह फेल दिखती है।

निष्कर्ष

इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, कि हमारे देश में ऐसा कुछ नहीं होता होगा। शायद होता हो पर मैंने अपने आसपास इस तरह की घटनाएं होते हुए कभी नहीं देखीं और न ही किसी के जरिए सुनी हैं। शायद यही वजह है कि मैं इस फिल्म के साथ खुद को उतना जोड़ नहीं सका।

तकनीकी रूप से यह बहुत कमजोर फिल्म है। 2 घंटे 11 मिनट की यह फिल्म तेजी के साथ चलती है। जिन दर्शकों को इसका पहला भाग ‘द केरला स्टोरी’ अच्छा लगा था और वे सोशल मैसेज पर बनी फिल्में देखना पसंद करते हैं, वे ‘द केरला स्टोरी 2’ को एक बार देख सकते हैं।

जिन्हें एंटरटेनमेंट, मास-मसाला और एक्शन फिल्में देखने का शौक है वे इससे दूरी बनाकर चलें। (बच्चों के साथ इसे न देखें)

रेटिंग: 2.5/5 स्टार

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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