देव खरौद की एक नई फिल्म इस फ्राइडे सिनेमा घरों में रिलीज की गई है जिसका नाम है “डीएसपी देव 2” (DSP Dev 2)। मैंने इसे देखा, आइए जानते हैं क्या है इस फिल्म में खास जो दर्शकों को इस फिल्म से जोड़ने में कामयाब रखता है। अब ये आपको डिसाइड करना है कि यह फिल्म ‘डीएसपी देव 1’ से कनेक्ट है या नहीं।
यह कहानी देव खरौद की दिखाई गई है, जो पहले फिल्म की तरह ही यहां पर भी ईमानदार पुलिस ऑफिसर की भूमिका में है। कुछ आरोपों की वजह से देव को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। अब इन्हें दोबारा से अपनी खोई हुई इज्जत वापिस लाने के लिए एक टास्क दिया जाता है।
इस टास्क में देव को काले धन का एक बड़ा रैकेट का पर्दाफाश करना है। देव अब अंडरकवर ऑफिसर के रूप में काम कर रहे हैं जो कि एक स्कूल में टीचर के रूप में पढ़ाने लगता है ताकि वह क्रिमिनलों से नजदीकियां बढ़ा सके।
देव बच्चों से कुछ ज्यादा ही घुल-मिल जाता है पर अपने लक्ष्य को हमेशा ध्यान में रखता है। अंदर-अंदर उसे पता लगता है कि काले धन के धंधे में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
आगे चलकर देव को पता चलता है कि ब्लैक मनी के इस काले धंधे में, क्रिमिनल ऑफ गैंगस्टर नहीं बल्कि औरतें और बच्चे शामिल हैं। साथ ही इस पूरे क्राइम में निर्दोष औरतों और बच्चों का इस्तेमाल हो रहा है।
कहानी में नए पन की कमी
मुझे ऐसा लगता है कि इस फिल्म को बच्चों के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि कहानी में एक जगह पर बच्चों के सामने ही एक खतरनाक मौत को दर्शाया गया है। अगर आप इस तरह की फिल्म बना रहे हैं, जहां बच्चों को भी फिल्म में महत्वपूर्ण जगह दी गई है, तो इस तरह के सीन को नहीं दिखाना चाहिए जिससे बच्चों पर गलत असर पड़े।
फिल्म “डीएसपी देव 2” की कहानी बेहद सिंपल और सरल है। इस तरह की स्टोरी आपने बहुत सी साउथ फिल्मों में पहले ही देख रखी होगी तो यह कह लीजिए कि यहां कुछ नया पेश नहीं किया गया।
दिलचस्प शुरुआत, लेकिन कमजोर अंत
कहानी का पहला हिस्सा बहुत ही इंटरेस्टिंग है वहीं दूसरे हिस्से की बात की जाए तो यहां असली खतरा बाहर निकल कर आता है।18 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को यह फिल्म काफी पसंद आएगी।
यहां बहुत ज्यादा एडल्ट सीन तो नहीं हैं पर फिर भी कुछ ऐसे शॉर्ट सीन दिखाए गए हैं, जो परिवार के साथ बैठकर देखने में अन कंफर्टेबल फील करा सकते हैं। मैं फिर एक बात कहूंगा कि मेकर को इस बात का पता था कि यह बच्चों वाली फिल्म बना रहे हैं, तो इस तरह के सीन को डालने की इन्हें जरूरत नहीं थी।
कहानी के अंत में फिल्म ने संदेश दिया है। इसे शिक्षकों के लिए बनाया गया है। देव खरौद का प्रदर्शन कुछ खास नहीं, जितना कि इनसे इस फिल्म में उम्मीद की जा रही थी।
देव खरौद से इसलिए भी एक्सपेक्टेशन कुछ ज्यादा थी क्योंकि इन्होंने अपनी फिल्म ‘रूपेंद्र गांधी द गैंगस्टर’, ‘रुपिंदर गांधी 2’, और ‘द रॉबिनहुड डाकुआं दा मुंडा’ में शानदार काम किया था। फिल्म के सभी गन सीन अच्छे से शूट किए गए हैं जिन्हें देखकर मजा आता है।
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