The Final Girls Review: कैसे एक मां बेटी का प्यार मौत के बाद भी जिंदा रहता है जानिए इस डरावनी फिल्म में

The Final Girls Hindi Dubbed Review: द फाइनल गर्ल"मां की मौत से दुखी मैक्स 80s हॉरर फिल्म की स्क्रीनिंग में फंस जाती है, जहां अपनी मां से मिलकर किलर से लड़ती है। मजेदार हॉरर-कॉमेडी

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February 10, 2026 3:20 PM (IST)
The Final Girls Hindi Dubbed

अगर आप भी मेरी तरह 80 की दशक की फिल्में देखने के शौकीन हैं तो ‘द फाइनल गर्ल्स‘ आपके लिए एक परफेक्ट मजेदार हॉरर कॉमेडी फिल्म है। द फाइनल गर्ल्स को आईएमडीबी पर 10 में से 6.5 की रेटिंग मिली है। यह रेटिंग 57 हजार लोगों के वोटों के द्वारा की गई है।

इस फिल्म का बजट लगभग उस समय के अनुसार $4.5 मिलियन के करीब का था। आइए जानते हैं अपने इस आर्टिकल के माध्यम से कि फिल्म आपको देखनी चाहिए या फिर नहीं।

क्या है इस फिल्म की बेसिक कहानी (स्पॉइलर फ्री)

कल्पना करिए मैक्स नाम की एक ऐसी लड़की जिसकी मां की मौत अचानक एक कार एक्सीडेंट में हो जाती है। मैक्स की मां डरावनी फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस हुआ करती थी। मैक्स को अपनी मां के गुजरने का बेहद दुख है जिस वजह से वह चुप-चुप रहने लगी है। दोस्तों के बहुत कहने पर मां की मौत की सालगिरह पर मैक्स अपनी मां की हॉरर फिल्म की स्क्रीनिंग पर जाती है।

The Final Girls Review
IMAGE CREDIT: The Final Girls Trailer

इस फिल्म के अंदर उसकी मां का एक बड़ा रोल है। यहां एक साइको किलर दिखाया गया है जो लोगों को मार रहा है। पर इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि फिल्म देखते ही देखते मैक्स और उसके सभी दोस्त 80 के दशक वाली इस फिल्म की दुनिया के अंदर चले जाते हैं और यहां फंसकर रह जाते हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि यहां मैक्स को अपनी मां भी मिलती है। अब आखिर किस तरह से मैक्स और उसके दोस्त फिल्म के अंदर घुस जाते हैं और क्या अब वह वापस आते भी हैं या वही फंसकर रह जाते हैं, यही सब फिल्म में आगे दिखाया जाता है।

फिल्म ‘द फाइनल गर्ल्स’ के द्वारा निर्देशक ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि मां-बेटी का प्यार मौत के बाद भी हमेशा जिंदा रहता है। मुझे जो फिल्म का सबसे बड़ा पॉजिटिव पॉइंट लगा वह यह था कि इसका हर एक सीन हमें सोचने पर मजबूर कर देता है, जो डराता भी है और हंसाता भी है।

क्या यह फिल्म आपको देखनी चाहिए या नहीं

द फाइनल गर्ल्स फिल्म को 2015 में रिलीज किया गया था और रिलीज के समय इसे सिर्फ और सिर्फ इंग्लिश भाषा में ही उपलब्ध कराया गया था पर अब फाइनली अब यह हिंदी डबिंग के साथ रिलीज कर दी गई है। फिल्म का सबसे अच्छा हिस्सा मुझे वह लगा जब मैक्स और उसके दोस्त अपनी मरी हुई मां की 80 के दशक की हॉरर फिल्म को देखने के लिए सिनेमा घर में जाते हैं।

दुर्भाग्यवश सिनेमा घर में आग लग जाती है और सभी लोग इधर-उधर भागने लगते हैं। तब मैक्स और उसके दोस्त सिनेमा घर के पर्दे के अंदर घुसकर बाहर निकलना चाहते हैं पर वह बाहर ना निकलकर फिल्म के अंदर ही प्रवेश कर जाते हैं जहां उनकी मुलाकात होती है फिल्म के सभी कैरेक्टर्स से जिसमें मैक्स की मां भी शामिल हैं।

अब इनका टास्क यह है कि फिल्म में दिखाए गए सीरियल किलर को इन सभी दोस्तों को मारना है। अगर यह उस सीरियल किलर को नहीं मार पाएंगे तब यह सभी इस फिल्म के अंदर हमेशा के लिए फंसे रह सकते हैं।

बहुत ज्यादा अगर इसके बारे में बताया जाए तो वह स्पॉइलर हो जाएगा। बस आप लोग यह समझ लीजिए कि फिल्म शुरू से लेकर अंत तक बहुत इंटरेस्टिंग है और एंडिंग ऐसी है जिसे देखकर होश उड़ सकते हैं।ऐसा नहीं है कि इस तरह की फिल्में पहले नहीं बनी हैं। एक इसी तरह की फिल्म लास्ट एक्शन हीरो भी पहले आ चुकी है जहां एक बच्चे को ‘अर्नाल्ड’ की फिल्म में फंसता हुआ दिखाया गया है।

‘द फाइनल गर्ल्स’ एक नार्मल बजट की फिल्म है जिसकी सिनेमैटोग्राफी, वीएफएक्स, म्यूजिक, बीजीएम सब कुछ शानदार तरीके से पेश किया गया है। मुझे तो यह फिल्म बहुत पसंद आई है इसलिए मैं इसे 3.5/5 स्टार की रेटिंग देता हूं। परिवार के साथ आप इसे बैठकर देख सकते हैं। इसमें किसी भी तरह की एडल्ट या गाली का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

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    मैं आमिर खान हूँ। हिंदी सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों-वेब सीरीज का गहराई से विश्लेषण और ईमानदार रिव्यू करता हूँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में कुछ साल काम करने का अनुभव भी रहा। बॉलीवुड की हर धड़कन, ट्रेंड्स और क्वालिटी कंटेंट पर पैनी नजर रखता हूँ। यहीं पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखता हूँ।

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