अगर ‘गुल्लक’ पसंद है, तो नेटफ्लिक्स की ’53 Sundays’ मिस न करें, पढ़ें इस इमोशनल फिल्म का पूरा रिव्यू

क्या आपने नेटफ्लिक्स की नई फिल्म '53 Sundays' देखी? 1 घंटे 19 मिनट की यह छोटी सी फिल्म भाई-बहन के रिश्तों और पुरानी कड़वाहटों की एक इमोशनल कहानी है। Cesc Gay के निर्देशन में बनी इस फिल्म का पूरा रिव्यू यहाँ पढ़ें और जानें इसे 4/5 रेटिंग क्यों मिली।

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March 28, 2026 12:41 PM (IST)
53 Sundays Movie Review

27 मार्च 2026 के दिन नेटफ्लिक्स लेकर आया है अपनी एक नई स्पेनिश फिल्म, जिसका नाम है ‘53 Sundays‘। इस फिल्म की टोटल लंबाई मात्र 78 मिनट मिनट के भीतर है। इस छोटी सी फिल्म का डायरेक्शन ‘Cesc Gay’ ने किया है, जो इससे पहले ‘Truman’ जैसी फिल्म की स्टोरी राइटिंग कर चुके हैं। फिल्म के जॉनर की बात करें तो यह कॉमेडी/ड्रामा के अंतर्गत आता है। ये फिल्म आधारित Cesc Gay के अपने थिएटर प्ले “53 diumenges” पर आधारित है।

53 Sundays फिल्म की स्टोरी: भाई बहन का मिलन

फिल्म में तीन भाई-बहन (जूलियन, विक्टर, नतालिया) अपने 86 वर्षीय पिता के बारे में फैसला करने के लिए मिलते हैं, क्योंकि पिता का व्यवहार अजीब होने लगा है, जिसमे वह मेंटल डिक्लाइन या फिर चीज़ों को भूलने लगते हैं। वे चर्चा करते हैं कि पिता को नर्सिंग होम भेजें या किसी के घर रखें। यह एक फैमिली मीटिंग है जिसमें पुराने झगड़े, रिश्तों की नाराजगी और बंटवारा होता है।

यहाँ कैराल (Alexandra Jiménez) और जूलियन (Javier Cámara) की शादी हुए काफी समय बीत चुका है, पर उन्हें अब तक संतान का सुख हासिल नहीं हुआ है। कैराल पेशे से एक नर्स है, तो वहीं जूलियन एक एक्टर है जो छोटी मोटी वेब सीरीजों में काम कर चुका है और बड़ा काम पाने के लिए अब भी हाथ पैर मार रहा है।

कहानी की शुरुआत में हमें पता चलता है कि जूलियन के दो और भाई-बहन भी हैं, जिनके नाम विक्टर और नतालिया (Carmen Machi) हैं। विक्टर (Javier Gutiérrez) और नतालिया दोनों ही जूलियन के घर उससे मिलने आने वाले हैं।

यह फिल्म यहीं से एक अतरंगा ट्विस्ट ले लेती है, जब जूलियन की बहन नतालिया उसके घर पर जाकर उससे मिलती है, तब वह जूलियन को बातों-बातों में बताती है कि उसके भाई विक्टर ने एक नॉवेल लिखी और पब्लिश की है, क्योंकि विक्टर पेशे से एक वकील है।

हालांकि, जूलियन को जैसे ही इस बात का पता चलता है, उसे गहरा सदमा लगता है।
पर मैं आपको बता दूँ, जूलियन को यह सदमा इसलिए नहीं लगता, कि उसके भाई ने कोई नॉवेल लिख दी है, बल्कि उसे यह सदमा इसलिए लगता है कि उसके भाई ने जूलियन को अपनी इस नई नॉवेल के बारे में बताया तक नहीं।

वहीं दूसरी तरफ, बहन नतालिया को उसने सब कुछ बताया और उसे अपनी नॉवेल भी दे दी। यही वजह है कि जूलियन काफी असहज महसूस कर रहा है। क्योंकि इस बात को बताने से पहले नतालिया इन तीनों भाई-बहनों के पिता के घर जाकर एक बल्ब को सही करने के लिए भी जूलियन को बोल चुकी थी, क्योंकि उनके पिता अब काफी बूढ़े हो चुके हैं और खुद बल्ब नहीं बदल सकते।

अब जूलियन और भी ज्यादा गुस्से में आ जाता है, क्योंकि उसे लग रहा है कि उसके भाई और बहन उसे फालतू समझते हैं। यही वजह है कि एक छोटा सा बल्ब लगाने के लिए भी वे खुद पहल नहीं कर रहे, बल्कि जूलियन को बोल रहे हैं।

फिल्म 53 Sundays की गहरी सीख:

यह फिल्म इसी तरह से खट्टी-मीठी बातों के जरिए आपको लगातार लुभाती रहती है, साथ ही भाई बहन के रिश्तों पर भी बारीकी से रोशनी डालती है कि भले ही भाई और बहन के रिश्ते कितने भी नाजुक मोड़ पर पहुंच जाए पर आखिर में सब कुछ सही हो जाता है।

यहां मैं फिल्म के मेकर्स की सराहना करना चाहूंगा, क्योंकि जिस तरह से उन्होंने अपनी इस फिल्म के माध्यम से रिश्तों की उढेड़ बुन को दिखाया है, वह लाजवाब है। जैसे कि वह सीन ‘जब कैरल को पता चलता है कि जल्द ही जूलियन के भाई-बहन उसके घर आने वाले हैं, तब वह बाजार से ताज़े फूलों का गुलदस्ता खरीद कर लाती है’ यकीन मानिए फिल्म के इस सीन के पीछे काफी गहरी बात छुपी हुई है। यही वजह है कि मेरे हिसाब से इमोशनली रूप से भी यह फिल्म काफी स्ट्रॉन्ग है।

फिल्म की छोटी सी कमी:

इसकी स्टोरी काफी एंगेजिंग और भावुक करने वाली भले ही हो, लेकिन फिल्म में काफी कम किरदार देखने को मिलते हैं साथ ही ज़्यादातर इंडोर के सीन्स भी देखने को मिलते हैं, जिस वजह से एक समय के बाद सब कुछ रिपीट जैसा महसूस होने लगता है। हालाँकि फिल्म इतनी छोटी है जिस वजह से ये कमी ज़ादा महसूस नहीं हो पाती।

निष्कर्ष:

अगर आप उस तरह की ऑडियंस हैं जिन्हें फैमिली और ड्रामा फिल्में देखना पसंद है, जैसे की भारतीय वेब सीरीज ‘गुल्लक’, तब आप 53 Sundays फिल्म को रिकमेंड कर सकते हैं। यह मूवी भावात्मक रूप से लबालब भरी हुई है जो फैमिली इमोशंस को गहराई से स्क्रीन पर पेश करती है।

लेकिन अगर आप उस तरह की ऑडियंस हैं, जो एक्शन थ्रिलर और हॉरर की शौकीन हैं, तब यह फिल्म आपके लिए बिल्कुल भी नहीं बनी है। इस मूवी में कोई भी एडल्ट या वल्गर सीन नहीं दिखाया गया, जिसकी वजह से आप इसे पूरी फैमिली के साथ आराम से देख सकते हैं।

रेटिंग: 4/5

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  • arslan khan is a author of oyeisfriday.com

    मैं अर्सलान खान हूँ। बॉलीवुड और OTT कंटेंट के गहन रिव्यू और विश्लेषण का शौक और विशेषज्ञता रखता हूँ। मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है, जिसमें फिल्म स्टडीज और क्रिटिसिज्म भी शामिल था। बीते समय में मुझे अमर उजाला के एंटरटेनमेंट डेस्क में काम करने का अनुभव रहा है। और अब मै Oyeisfriday पर बेबाक और गहराई वाले रिव्यूज़ लिखता हूँ,फिर चाहे फिल्म हो या वेब सीरीज।

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